बंगाल में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण: 90 लाख से ज्यादा नाम कटे, EC ने जारी किया जिलेवार डेटा
बंगाल में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण: 90 लाख से ज्यादा नाम कटे, EC ने जारी किया जिलेवार डेटा
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। चुनाव आयोग ने न्यायिक सुनवाई पूरी होने के बाद कुल 90,83,345 से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं। आयोग ने पहली बार जिलेवार डेटा भी जारी कर दिया है, जिसमें मुर्शिदाबाद जिले में सबसे ज्यादा नाम कटने की बात सामने आई है।
कितने नाम कटे और कैसे?
फरवरी 2026 में प्रकाशित अंतिम सूची में पहले ही 63.67 लाख नाम हटाए जा चुके थे।
अब हालिया न्यायिक निर्णय प्रक्रिया (अधिकतर 60 लाख से ज्यादा विचाराधीन मामलों) में अतिरिक्त 27.16 लाख नाम हटाए गए।
कुल मिलाकर 90.83 लाख (लगभग 91 लाख) नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं।
इन नामों को मुख्य रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लिकेट या दस्तावेजों में विसंगति के आधार पर हटाया गया। जिन लोगों का नाम हटा है, वे अपील कर सकते हैं, लेकिन फ्रिजिंग की समयसीमा के बाद वोटिंग में शामिल होने पर असर पड़ सकता है।
प्रमुख जिलों में स्थिति (जिलेवार हाइलाइट्स)
मुर्शिदाबाद: सबसे ज्यादा नाम कटे (सबसे ऊंची संख्या)।
अन्य प्रभावित जिलों में मालदा, उत्तर और दक्षिण 24 परगना, नदिया आदि शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में नाम हटाए गए।
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राज्य के कुल मतदाताओं में करीब 15-16% की कमी आई है।
चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुसार की गई है। फर्जी या दोहरे नामों को हटाकर सूची को शुद्ध बनाया गया है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं और कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर विरोध भी दर्ज किया गया।
क्या करें अगर आपका नाम कट गया हो?
आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से चेक करें।
जरूरी दस्तावेजों के साथ अपील दायर कर सकते हैं।
यह विकास बंगाल के आगामी चुनावी माहौल को काफी प्रभावित करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि मतदाता संख्या में बड़ा फेरबदल हुआ है। EC ने साफ किया है कि केवल वैध दस्तावेजों वाले मतदाताओं का ही नाम अंतिम सूची में शामिल किया जाएगा।
(स्रोत: चुनाव आयोग के हालिया अपडेट और विभिन्न समाचार रिपोर्ट्स के आधार पर। जिलेवार विस्तृत आंकड़े आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।)
