Tuesday, October 27, 2026
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बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान का दिल्ली दौरा: क्या यूनुस काल की कड़वाहट होगी दूर?

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 7 अप्रैल को दिल्ली पहुंचेंगे: यूनुस काल की कड़वाहट होगी दूर? दौरे का पूरा एजेंडा

बांग्लादेश की नई सरकार (प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP सरकार) के विदेश मंत्री डॉ. खलीलुर रहमान 7-8 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली का दौरा करेंगे। यह दौरा यूनुस के अंतरिम शासन (अगस्त 2024 से फरवरी 2026 तक) के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई ठंडक और कड़वाहट को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात मुख्य कार्यक्रम रहेगी। खलीलुर रहमान मॉरीशस में 9वें इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के रास्ते में दिल्ली रुकेंगे। यह उनकी विदेश मंत्री बनने के बाद भारत की पहली यात्रा है और तारिक रहमान सरकार बनने के बाद बांग्लादेश की ओर से उच्चस्तरीय संपर्क की शुरुआत है।

यूनुस काल की कड़वाहटें क्या थीं?

शेख हसीना के भारत में शरण लेने पर लगातार विवाद और बयानबाजी।

यूनुस सरकार के दौरान भारत के प्रति आलोचनात्मक रुख, चीन की ओर झुकाव और कुछ मामलों में पाकिस्तान से निकटता की कोशिशें।

सीमा, व्यापार, ऊर्जा और पानी के मुद्दों पर ठहराव।

भारत में रह रही हसीना को लेकर बार-बार extradition की मांग।

नई सरकार के आने के बाद दोनों देश संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में बांग्लादेश के हाई कमिश्नर की भारतीय सेना प्रमुख से मुलाकात और रक्षा सहयोग पर चर्चा भी इसी दिशा में देखी जा रही है।

दौरे का संभावित एजेंडा

द्विपक्षीय संबंधों का रीसेट: राजनीतिक विश्वास बहाली, व्यापार-वाणिज्य बढ़ाना और सीमा प्रबंधन।

गंगा जल संधि का नवीनीकरण: दिसंबर 2026 में संधि के 30 साल पूरे होने वाले हैं, इस पर चर्चा संभव।

ऊर्जा संकट और व्यापार: पश्चिम एशिया युद्ध के कारण बांग्लादेश में ऊर्जा संकट है, भारत से ईंधन और बिजली सप्लाई पर बात।

अन्य मुद्दे: कनेक्टिविटी, सुरक्षा सहयोग, लोगों के बीच संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता।

विदेश मंत्री खलीलुर रहमान जयशंकर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और वाणिज्य मंत्री से भी मुलाकात कर सकते हैं।

दोनों पक्ष इस यात्रा को “रिश्तों को सामान्य करने” और “नई शुरुआत” के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, शेख हसीना से जुड़े मुद्दे अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।

यह दौरा भारत-बांग्लादेश संबंधों में सकारात्मक मोड़ ला सकता है, खासकर जब दोनों देश क्षेत्रीय चुनौतियों (चीन का प्रभाव, व्यापार मंदी आदि) से निपट रहे हैं।

दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसी संबंध दोनों की जनता के हित में हैं। यात्रा के नतीजे आने वाले दिनों में साफ होंगे।

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