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सुप्रीम कोर्ट का सख्त अल्टीमेटम: बंगाल में कल तक वोटर लिस्ट पब्लिश करो, चुनाव आयोग को 24 घंटे का वक्त

सुप्रीम कोर्ट का सख्त अल्टीमेटम: बंगाल में कल तक वोटर लिस्ट पब्लिश करो, चुनाव आयोग को 24 घंटे का वक्त

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तगड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सोमवार को चुनाव आयोग को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि कल तक राज्य में पहली फेज की वोटर लिस्ट पब्लिश कर दी जाए।

चीफ जस्टिस एस. कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि बंगाल में विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के तहत लंबित मामलों को जल्द निपटाया जाए और अधूरी वोटर लिस्ट को भी तुरंत प्रकाशित किया जाए। कोर्ट ने कहा, “बंगाल में कल तक वोटर लिस्ट पब्लिश करो”।

क्या है पूरा मामला?

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान 1.25 करोड़ से ज्यादा वोटर एंट्रीज में “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” पाई गई थी।

इनमें से कई नामों को डिलीट किया गया या “अंडर अड्जूडिकेशन” रखा गया।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही 19 अपीलेट ट्रिब्यूनल गठित किए थे, जिसमें जजों को शामिल किया गया ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का मतलब स्थायी रूप से वोटिंग राइट छीनना नहीं है। योग्य नागरिकों को पूरक सूची (Supplementary List) के जरिए शामिल किया जा सकता है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि रोजाना अड्जूडिकेशन की लिस्ट पब्लिश की जा रही है, लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं दिखा और सख्त निर्देश दिए।

पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर वोटर लिस्ट का मुद्दा काफी गरम है। TMC और BJP दोनों पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में 58 लाख से ज्यादा नाम डिलीट होने का जिक्र है, जबकि EC का कहना है कि डुप्लिकेट, मृतक और माइग्रेटेड वोटर्स को हटाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी बंगाल सरकार और EC के बीच “ट्रस्ट डेफिसिट” पर नाराजगी जताई थी और न्यायिक अधिकारियों को इस प्रक्रिया में शामिल किया था।

अब कोर्ट के इस अल्टीमेटम के बाद कल (7 अप्रैल 2026) तक पहली पूरक या अपडेटेड वोटर लिस्ट आने की उम्मीद है। इससे चुनावी तैयारियों पर असर पड़ सकता है, लेकिन कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित न करने का भी संकेत दिया है।

यह फैसला बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। दोनों प्रमुख पार्टियां अब इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही हैं।

क्या लगता है आपको – यह फैसला वोटर लिस्ट को और पारदर्शी बनाएगा या चुनाव में नई उलझन पैदा करेगा? कमेंट में बताएं।

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