असम चुनाव: पासपोर्ट विवाद को लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस में आर-पार
असम चुनाव: पासपोर्ट विवाद को लेकर मुख्यमंत्री और कांग्रेस में आर-पार
असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद, मुख्यमंत्री ने न केवल इन दावों को खारिज किया है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी ऐलान कर दिया है।
1. कांग्रेस का बड़ा हमला: ‘तीन देशों के पासपोर्ट’ का दावा
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं। खेड़ा के अनुसार, यह नागरिकता कानूनों का सीधा उल्लंघन है और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा मुद्दा है।
2. मुख्यमंत्री का पलटवार: ‘प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश’
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हार के डर से हताश हो गई है और अब व्यक्तिगत हमलों और झूठ का सहारा ले रही है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर एक विस्तृत पोस्ट लिखकर कांग्रेस द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों को “डिजिटल हेरफेर” करार दिया।
3. दस्तावेजों में मिलीं तकनीकी खामियां
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस द्वारा सर्कुलेट किए जा रहे दस्तावेजों में कई गंभीर गलतियों की ओर इशारा किया है:
* नाम की गलत स्पेलिंग: दस्तावेजों में ‘SARMA’ की जगह ‘SHARMA’ लिखा गया है।
* राष्ट्रीयता में भ्रम: यूएई (UAE) की आईडी में राष्ट्रीयता ‘Egypt’ (मिस्र) दर्ज है, जो तर्कहीन है।
* स्पेलिंग की गलतियां: पासपोर्ट में ‘Egyptian’ को ‘Egyptiann’ लिखा गया है, जो किसी भी आधिकारिक दस्तावेज में संभव नहीं है।
* अमान्य QR कोड: संपत्ति के कागजात पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करने पर कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है।
4. मानहानि का मुकदमा दर्ज करने की घोषणा
हिमंत बिस्वा सरमा ने साफ किया है कि वे इस मामले को हल्के में नहीं लेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि:
* वे अगले 48 घंटों के भीतर पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक (Criminal) और दीवानी (Civil) मानहानि का केस दर्ज करेंगे।
* उन्होंने कहा, “कानून अपना काम करेगा और पवन खेड़ा को इन झूठे आरोपों के लिए गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।”
5. चुनावी माहौल पर प्रभाव
असम में चुनावी सरगर्मी के बीच इस व्यक्तिगत हमले ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। भाजपा इसे राज्य की जनता को गुमराह करने की कोशिश बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे पारदर्शिता और भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर जनता के बीच ले जा रही है। अब यह विवाद रैलियों से निकलकर अदालत की दहलीज तक पहुँच गया है।
