शिक्षा के मंदिर में ‘भूत मंदिर’: बागेश्वर के स्कूल में अंधविश्वास का खेल, छात्रों से वसूले गए पैसे
शिक्षा के मंदिर में ‘भूत मंदिर’: बागेश्वर के स्कूल में अंधविश्वास का खेल, छात्रों से वसूले गए पैसे
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक चेतना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कौसानी के एक सरकारी स्कूल में कथित तौर पर ‘आत्मा के साये’ को दूर करने के लिए ‘भूत मंदिर’ का निर्माण कराया गया, जिसके लिए खुद छात्र-छात्राओं से चंदा वसूला गया।
यहाँ इस पूरे विवाद और जांच की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
1. 25 हजार में बना ‘भूत मंदिर’
बागेश्वर जिले के राजकीय इंटर कॉलेज (GIC), कौसानी के परिसर में लगभग 25 हजार रुपये की लागत से एक छोटे मंदिर का निर्माण कराया गया है।
* अंधविश्वास की जड़: स्थानीय लोगों और स्कूल में यह चर्चा आम थी कि जिस स्थान पर मंदिर बना है, वहां सालों पहले किसी की अकाल मृत्यु हुई थी।
* छात्राओं का बेहोश होना: पिछले कुछ समय से स्कूल की कई छात्राएं रहस्यमयी ढंग से बेहोश हो रही थीं। स्वास्थ्य विभाग की काउंसलिंग के बावजूद स्थिति नहीं सुधरी, तो समाधान के तौर पर ‘भूत मंदिर’ बनाने का रास्ता चुना गया।
2. छात्रों से वसूली और वित्तीय आरोप
मामले ने तब तूल पकड़ा जब यह पता चला कि मंदिर निर्माण के लिए बच्चों से पैसे लिए गए हैं:
* वसूली: आरोप है कि स्कूल के 218 छात्रों से 100-100 रुपये वसूले गए, जिससे कुल 21,800 रुपये जमा हुए। शिक्षकों के योगदान को मिलाकर करीब 25 हजार रुपये खर्च किए गए।
* सफाई शुल्क का विवाद: अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 से छात्रों से 50 रुपये प्रति माह ‘सफाई शुल्क’ लिया जा रहा है, जो कि कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए नियमों के विरुद्ध है।
3. अभिभावक संघ की सफाई: “बलि प्रथा रोकने को बनाया मंदिर”
वहीं, अभिभावक संघ के अध्यक्ष चंदन सिंह भंडारी ने इन आरोपों को साजिश करार दिया है। उनका कहना है:
* तथ्यों का बचाव: वहां कोई महिला नहीं, बल्कि 30 साल पहले एक नेपाली मूल के व्यक्ति ने आत्महत्या की थी।
* अराजकता पर रोक: उस स्थान पर लोग छिपकर शराब पीते थे और मुर्गियों की बलि चढ़ाते थे। इस गंदगी और अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए सर्वसम्मति से वहां मंदिर बनाने और शांति पाठ कराने का निर्णय लिया गया ताकि बच्चों के मन से डर निकले।
4. शिक्षा विभाग सख्त, जांच के आदेश
मामला सुर्खियों में आते ही प्रशासन हरकत में आ गया है:
* मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) बागेश्वर, विनय कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
* गरुड़ खंड शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
* प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्कूल जैसे शैक्षणिक संस्थान में अंधविश्वास को बढ़ावा देना और छात्रों से अवैध वसूली करना अक्षम्य है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विद्वानों का मत: जहाँ एक ओर विज्ञान और शिक्षा के जरिए अंधविश्वास मिटाने की बात होती है, वहीं सरकारी स्कूल परिसर में ही ‘भूत’ के नाम पर मंदिर निर्माण और धन उगाही राज्य की शिक्षा नीति और वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) पर एक बड़ा तमाचा है।
निष्कर्ष: अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग की जांच में क्या निकलकर आता है—क्या यह वाकई अराजकता रोकने की एक ‘सकारात्मक पहल’ थी या फिर शिक्षा के मंदिर में अंधविश्वास का एक नया अध्याय?
