ईरान में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और जवाद ज़रीफ पर जासूसी के आरोप!
ईरान में जारी युद्ध और आंतरिक उथल-पुथल के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के सुरक्षा बलों ने जासूसी के गंभीर आरोपों में कई हाई-प्रोफाइल लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी (Hassan Rouhani) और पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ (Mohammad Javad Zarif) का उभर कर आ रहा है, जिन्हें लेकर ईरान के भीतर राजनीतिक घमासान मच गया है।
यहाँ इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
ईरान में बड़ा राजनीतिक भूचाल: पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी और जवाद ज़रीफ पर जासूसी के आरोप!
ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और न्यायपालिका ने हाल ही में देशव्यापी छापेमारी के दौरान लगभग 500 लोगों को ‘दुश्मन देशों’ (अमेरिका और इजरायल) के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की आंच अब ईरान के उन दिग्गज नेताओं तक पहुँच गई है जो सालों तक सत्ता के शीर्ष पर रहे हैं।
1. हसन रूहानी: 8 साल तक रहे राष्ट्रपति, अब ‘गद्दारी’ के आरोप?
हसन रूहानी, जिन्होंने 2013 से 2021 (लगातार 8 साल) तक ईरान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया, कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।
* आरोप: रूहानी और उनके करीबियों पर आरोप है कि उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) के दौरान और उसके बाद पश्चिमी देशों के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की, जिससे ईरान की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।
* ताजा कार्रवाई: युद्ध के माहौल के बीच, ईरानी अभियोजकों ने रूहानी के प्रशासन के दौरान हुए फैसलों को “राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता” करार दिया है। उनके पूर्व मीडिया सलाहकार, इमाद आबशेनास ने भी माना है कि राज्य और समाज के बीच विश्वास का गहरा संकट पैदा हो गया है।
2. मोहम्मद जवाद ज़रीफ: ‘परमाणु समझौते के शिल्पकार’ पर शिकंजा
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ, जो रूहानी सरकार का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय चेहरा थे, उन पर भी जासूसी और विदेशी संपर्कों के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
* विवाद: कट्टरपंथी गुटों का दावा है कि ज़रीफ ने अपनी कूटनीति की आड़ में संवेदनशील सैन्य जानकारी लीक की।
* मौजूदा स्थिति: मार्च 2026 में जारी युद्ध के बीच, ज़रीफ ने अमेरिका के साथ शांति समझौते की अपील की थी, जिसे ईरानी प्रशासन ने ‘दुश्मन की मदद’ और ‘मनोवैज्ञानिक युद्ध’ का हिस्सा माना है।
क्यों हो रही है यह कार्रवाई?
ईरान में इस समय “ऑपरेशनल क्लीन-अप” चल रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण ये हैं:
* युद्ध का दबाव: फरवरी 2026 से अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे सीधे संघर्ष के बाद, ईरान अपने भीतर मौजूद किसी भी ‘उदारवादी’ आवाज को दबाना चाहता है।
* सत्ता संघर्ष: कट्टरपंथी धड़ा रूहानी और ज़रीफ जैसे नेताओं को पूरी तरह दरकिनार करना चाहता है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित सुधारवादी आंदोलन को जड़ से खत्म किया जा सके।
* 500 से अधिक गिरफ्तारियां: केवल नेता ही नहीं, बल्कि कलाकार, पत्रकार और आम नागरिकों को भी ‘दुश्मन के लिए जासूसी’ के संदेह में जेल भेजा गया है।
निष्कर्ष: यदि इन आरोपों के तहत मुकदमा चलता है, तो ईरान के कानून के अनुसार इनमें मृत्युदंड (Death Penalty) तक का प्रावधान है। दुनिया भर के विशेषज्ञ इसे ईरान के भीतर चल रही एक बड़ी “पॉलिटिकल पर्ज” (राजनीतिक सफाई) के रूप में देख रहे हैं।
