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ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है परमाणु तबाही का खतरा?

ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट पर हमला: क्या दुनिया पर मंडरा रहा है परमाणु तबाही का खतरा?

ईरान के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील बुशहर (Bushehr) परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हुए हालिया हवाई हमले ने वैश्विक स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। फारस की खाड़ी के तट पर स्थित यह प्लांट न केवल ईरान की बिजली आपूर्ति का मुख्य केंद्र है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यहाँ जानिए इस प्लांट की खासियत और हमले के बाद पैदा हुए रेडिएशन के खतरे की पूरी सच्चाई:

क्या है बुशहर न्यूक्लियर प्लांट?

बुशहर प्लांट मध्य पूर्व का पहला नागरिक परमाणु बिजली घर है।

* रूसी तकनीक: इसे रूस की परमाणु एजेंसी ‘रोसाटॉम’ की मदद से तैयार किया गया है।

* क्षमता: यहाँ 1000 मेगावाट का ‘लाइट वाटर रिएक्टर’ (VVER-1000) काम करता है।

* लोकेशन: यह रणनीतिक रूप से फारस की खाड़ी के किनारे स्थित है, जो इसे सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से संवेदनशील बनाता है।

कितना बड़ा है रेडिएशन का खतरा?

परमाणु संयंत्र पर हमला होना किसी बड़े पर्यावरणीय संकट से कम नहीं है। विशेषज्ञों ने रेडिएशन को लेकर निम्नलिखित चेतावनियां दी हैं:

* रिएक्टर की मजबूती: बुशहर का मुख्य रिएक्टर एक बेहद मोटे कंक्रीट और स्टील के ‘कंटेनमेंट डोम’ के अंदर होता है। अगर हमला केवल बाहरी इमारतों या ग्रिड पर हुआ है, तो रेडिएशन का खतरा कम है।

* चेरनोबिल जैसी स्थिति का डर: यदि मिसाइल मुख्य रिएक्टर कोर को भेद देती है, तो रेडियोधर्मी बादल (Radioactive Clouds) हवा के साथ पड़ोसी खाड़ी देशों जैसे कुवैत, सऊदी अरब और यूएई तक फैल सकते हैं।

* समुद्री संकट: रिएक्टर को ठंडा करने के लिए समुद्र के पानी का उपयोग होता है। रिसाव की स्थिति में फारस की खाड़ी का पानी रेडियोधर्मी हो सकता है, जिससे समुद्री जीव और पीने के पानी के प्लांट (Desalination Plants) बर्बाद हो सकते हैं।

वर्तमान स्थिति और सुरक्षा कवच

ईरानी प्रशासन के अनुसार, हमले के तुरंत बाद ‘इमरजेंसी शटडाउन’ प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिया गया था।

* ऑटोमैटिक सेफगार्ड: आधुनिक लाइट वाटर रिएक्टर किसी भी बड़े झटके या बिजली कटने पर खुद को सुरक्षित मोड में डाल देते हैं।

* IAEA की निगरानी: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने कहा है कि वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल ग्राउंड जीरो से बड़े पैमाने पर रेडिएशन लीक की पुष्टि नहीं हुई है।

विशेषज्ञों की राय: परमाणु संयंत्र पर हमला करना ‘जिनेवा कन्वेंशन’ का उल्लंघन है। यदि रेडिएशन लीक होता है, तो यह केवल ईरान की समस्या नहीं रहेगी, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के लिए एक मानवीय और पर्यावरणीय आपदा बन सकती है।

 

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