चमोली में झलके जाम, राजस्व ने तोड़े तमाम रिकॉर्ड; एक साल में गटक गए 92.84 करोड़ की शराब
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली से आबकारी विभाग के लिए राहत, लेकिन समाज के लिए चिंताजनक खबर सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में शराब की बिक्री ने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
चमोली में झलके जाम, राजस्व ने तोड़े तमाम रिकॉर्ड; एक साल में गटक गए 92.84 करोड़ की शराब
गोपेश्वर (चमोली): देवभूमि के पहाड़ी जिलों में शराब की खपत कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। चमोली जिले में आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड तोड़ कमाई की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल जिले में 92.84 करोड़ रुपये की शराब बिकी है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
राजस्व का बढ़ता ग्राफ और भविष्य के बड़े लक्ष्य
शराब की इस ताबड़तोड़ बिक्री को देखते हुए आबकारी विभाग ने आने वाले वर्षों के लिए और भी ऊंचे लक्ष्य (Targets) निर्धारित किए हैं:
* वित्तीय वर्ष 2026-27: विभाग ने 99 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य रखा है।
* वित्तीय वर्ष 2027-28: लक्ष्य को बढ़ाकर 103 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सरकार और विभाग शराब की बिक्री को राजस्व बढ़ाने के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देख रहे हैं।
सामाजिक ताने-बाने पर संकट की आहट
एक ओर जहाँ सरकारी खजाना भर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समाज और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस प्रवृत्ति को लेकर गहरी चिंता है। विशेषज्ञों का मानना है:
* युवाओं पर असर: शराब की आसान उपलब्धता पहाड़ी युवाओं के भविष्य को अंधकार में डाल रही है।
* पारिवारिक कलह: बढ़ती खपत से घरेलू हिंसा और पारिवारिक विघटन के मामले बढ़ने की आशंका है।
* विद्रोही स्वर: गौर करने वाली बात यह है कि चमोली के कई गांवों में महिलाओं ने स्वेच्छा से शराब बंदी लागू की हुई है, लेकिन रिकॉर्ड बिक्री के आंकड़े इन प्रयासों को चुनौती दे रहे हैं।
आबकारी विभाग का पक्ष
जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मण बिष्ट ने बताया कि जिले में राजस्व प्राप्ति का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। उन्होंने कहा:
“जिले की सभी शराब की दुकानें नियमानुसार संचालित की जा रही हैं। विभाग की कोई भी देयता (Dues) शेष नहीं है और लक्ष्य के अनुरूप राजस्व प्राप्त किया गया है।”
राजस्व बनाम जनहित की बहस
राजस्व बढ़ाने की इस अंधी दौड़ में अब चमोली की जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या केवल सरकारी खजाना भरना ही प्राथमिकता होनी चाहिए? सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपील की है कि राजस्व के साथ-साथ शराब के सामाजिक दुष्परिणामों पर भी अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।
मुख्य बिंदु:
* कुल बिक्री (2025-26): ₹92.84 करोड़।
* अगला लक्ष्य: ₹99 करोड़ (2026-27)।
* चुनौती: कई गांवों में पूर्ण शराब बंदी के बावजूद बढ़ती कुल खपत।
