अन्तर्राष्ट्रीय

होर्मुज समिट 2026: ब्रिटेन की अगुवाई में 35 देशों का महामंथन, भारत को मिला विशेष न्योता

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की यह पहल वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, और इसके बंद होने या बाधित होने का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है।

होर्मुज समिट 2026: ब्रिटेन की अगुवाई में 35 देशों का महामंथन, भारत को मिला विशेष न्योता

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध (ईरान वॉर 2026) के कारण दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण ‘ऊर्जा धमनी’ यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर उपजे संकट को देखते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने एक आपातकालीन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (Hormuz Summit) बुलाया है। ब्रिटेन ने इस महत्वपूर्ण चर्चा के लिए भारत सहित 35 से अधिक देशों को आमंत्रित किया है।

समिट का मुख्य उद्देश्य: “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन”

ईरान द्वारा इस समुद्री रास्ते को प्रभावी ढंग से ब्लॉक किए जाने के बाद से दुनिया भर में तेल और गैस की आपूर्ति चरमरा गई है। इस बैठक के तीन मुख्य लक्ष्य हैं:

* रास्ता खुलवाना: फंसे हुए व्यापारिक जहाजों और चालक दल (Seafarers) की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करना।

* राजनयिक समाधान: सैन्य टकराव के बजाय कूटनीतिक रास्तों से समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) बहाल करना।

* वैश्विक गठबंधन: अमेरिका की अनुपस्थिति (ट्रम्प प्रशासन के रुख के कारण) में एक नया अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाना जो व्यापारिक जहाजों को एस्कॉर्ट कर सके।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार:

* भारत की भागीदारी: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री इस वर्चुअल बैठक में हिस्सा ले रहे हैं।

* ऊर्जा सुरक्षा: भारत के कई LPG और कच्चे तेल के टैंकर वर्तमान में इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं या उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए खाड़ी देशों से समन्वय की आवश्यकता है।

* रणनीतिक भूमिका: भारत के ईरान और पश्चिम, दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं, जिससे वह इस संकट में एक ‘मध्यस्थ’ (Mediator) की भूमिका निभा सकता है।

अमेरिका का रुख और ब्रिटेन की चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में अमेरिका शामिल नहीं हो रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज की सुरक्षा की जिम्मेदारी उन देशों की है जो इस रास्ते का उपयोग करते हैं। ऐसे में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान और भारत जैसे देश मिलकर एक वैकल्पिक सुरक्षा ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: डेटा फाइल

* महत्व: दुनिया के कुल तेल उपभोग का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है।

* वर्तमान स्थिति: फरवरी 2026 के अंत से यह मार्ग लगभग बंद है, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं।

* भारत का हित: भारत ने हाल ही में अपने 4 LPG जहाजों को सुरक्षित निकाला है, लेकिन भविष्य की आपूर्ति के लिए इस रास्ते का खुलना अनिवार्य है।

निष्कर्ष: यह समिट यह तय करेगी कि क्या दुनिया बिना अमेरिका के सक्रिय सहयोग के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग को सुरक्षित रख सकती है। भारत की मौजूदगी यह दर्शाती है कि वैश्विक मंच पर उसकी कूटनीतिक ताकत अब अनिवार्य हो चुकी है।

 

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