उत्तराखंड

चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड परिवहन विभाग की चिंता बढ़ी, ग्रीन सेस वसूलने वाले ANPR कैमरों के केबल काट रहे शरारती तत्व

चारधाम यात्रा से पहले उत्तराखंड परिवहन विभाग की चिंता बढ़ी, ग्रीन सेस वसूलने वाले ANPR कैमरों के केबल काट रहे शरारती तत्व

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों के बीच परिवहन विभाग के सामने एक नई और अजीबोगरीब चुनौती खड़ी हो गई है। बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर लगाए गए ‘ग्रीन सेस’ की वसूली को बाधित करने के लिए शरारती तत्व तकनीक पर प्रहार कर रहे हैं। हरिद्वार के नारसन बॉर्डर सहित कई प्रवेश द्वारों पर लगे ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरों के केबल काटे जाने की घटनाएं सामने आई हैं।

राजस्व को लग रहा चूना: प्रतिदिन 20 लाख की कमाई

उत्तराखंड में 15 मार्च से ग्रीन सेस की वसूली शुरू हुई थी। आंकड़ों के अनुसार:

* विभाग को अब तक लगभग 6 करोड़ रुपये का राजस्व मिल चुका है।

* औसतन रोजाना 20 लाख रुपये सरकारी खाते में जमा हो रहे हैं।

* आगामी यात्रा सीजन में लाखों वाहनों के आने से इस कमाई के कई गुना बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन केबल कटने से इस पर बट्टा लग रहा है।

शरारती तत्व या टैक्स चोरी की साजिश?

अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह के अनुसार, धर्मपुर, काशीपुर और नारसन बॉर्डर पर केबल काटने के मामले सामने आए हैं। विभाग को अंदेशा है कि उत्तराखंड में रह रहे वे लोग, जिनके पास बाहरी राज्यों के नंबर वाले वाहन हैं, वे ग्रीन सेस (फास्टटैग के जरिए कटौती) से बचने के लिए इन कैमरों को निशाना बना रहे हैं।

तकनीकी बाधाएं: सर्वर स्पेस और बिजली कटौती

विभाग इस समस्या से निपटने की कोशिश कर रहा है, लेकिन राह में दो बड़े रोड़े हैं:

* डाटा बैकअप की कमी: आईटीडीए (ITDA) के सर्वर में स्पेस कम होने के कारण सर्विलांस कैमरों का बैकअप केवल एक दिन का ही रह पाता है। इससे केबल काटने वालों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। अब विभाग डाटा को एक महीने तक स्टोर करने की योजना बना रहा है।

* बिजली की किल्लत: बॉर्डर क्षेत्रों में भारी बिजली कटौती होती है और यूपीएस का बैकअप कम पड़ता है। समाधान के तौर पर नारसन बॉर्डर (जहां से 50% ट्रैफिक आता है) पर जनरेटर लगाने पर विचार किया जा रहा है।

सुरक्षा के लिए ‘मैनपावर’ पर विचार

परिवहन विभाग अब इन संवेदनशील कैमरों और जनरेटरों की सुरक्षा के लिए मैनपावर तैनात करने पर विचार कर रहा है। विभाग का मानना है कि यदि समय रहते इन तकनीकी और सुरक्षा संबंधी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो चारधाम यात्रा के दौरान राज्य को मिलने वाले करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है।

मुख्य बिंदु:

* प्रभावित क्षेत्र: नारसन बॉर्डर, धर्मपुर, काशीपुर।

* तकनीकी समाधान: 30 दिन का डाटा बैकअप और जनरेटर की सुविधा।

* वसूली का तरीका: फास्टटैग के जरिए ऑटोमैटिक कटौती।

 

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