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सम्राट संप्रति: मौर्य साम्राज्य का वो योद्धा जिसके नाम PM मोदी ने किया विशाल म्यूजियम, जानें पाटलिपुत्र से काबुल तक की विजय गाथा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज महावीर जयंती के शुभ अवसर पर गांधीनगर के कोबा तीर्थ (श्री महावीर जैन आराधना केंद्र) में सम्राट संप्रति संग्रहालय (Samrat Samprati Museum) का भव्य उद्घाटन किया। यह म्यूजियम जैन विरासत, अहिंसा और सम्राट संप्रति के योगदान को समर्पित है, जिसमें 7 गैलरी में 2000 से अधिक दुर्लभ कलाकृतियां, मूर्तियां, पांडुलिपियां और आधुनिक ऑडियो-विजुअल प्रदर्शनियां शामिल हैं।

सम्राट संप्रति कौन थे?

सम्राट संप्रति (224-215 ईसा पूर्व) मौर्य वंश के पांचवें सम्राट थे। वे सम्राट अशोक के पोते और अंधे पुत्र कुणाल के पुत्र थे। चंद्रगुप्त मौर्य उनके परदादा थे।

साम्राज्य की सीमा: उन्होंने मौर्य साम्राज्य के पश्चिमी और दक्षिणी हिस्से पर शासन किया। उनकी राजधानी उज्जैन थी, जबकि उनके चचेरे भाई दशरथ ने पूर्वी हिस्से (पाटलिपुत्र) पर शासन किया। उनका साम्राज्य पाटलिपुत्र से काबुल (अफगानिस्तान) तक और दक्षिण भारत तक फैला हुआ था।

जैन धर्म के प्रचारक: जैन ग्रंथों में उन्हें ‘जैन अशोक’ कहा जाता है। जैन आचार्य सुहस्तिन के प्रभाव से वे जैन धर्म की ओर आकर्षित हुए और पूरे जीवन जैन धर्म के प्रसार में लगे रहे।

मंदिर निर्माण: उन्होंने 1,25,000 (सवा लाख) नए जैन मंदिर बनवाए, 36,000 पुराने मंदिरों की मरम्मत कराई और 1.25 करोड़ जैन मूर्तियां स्थापित कीं। गुजरात के पालिताणा, विरमगाम, उज्जैन के आगर मालवा आदि में कई मंदिर आज भी उनके नाम से जुड़े हैं।

अन्य योगदान: उन्होंने जैन भिक्षुओं को विदेशों (अफगानिस्तान, ईरान आदि) तक जैन धर्म प्रचार के लिए भेजा। वे शांतिप्रिय, प्रजा-वत्सल और अहिंसा के सच्चे समर्थक थे। जैन परंपरा उन्हें इतिहास का पहला चक्रवर्ती सम्राट मानती है।

आज का कार्यक्रम

पीएम मोदी ने जैन संतों की उपस्थिति में म्यूजियम का उद्घाटन किया और कहा कि यह संग्रहालय भारत की गौरवपूर्ण अतीत और जैन संस्कृति को जीवंत करता है। म्यूजियम में आधुनिक तकनीक (AI और डिजिटल इंस्टॉलेशन) के साथ प्राचीन अवशेषों को प्रदर्शित किया गया है, जो अहिंसा, करुणा और जैन दर्शन को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा।

यह उद्घाटन महावीर जयंती पर जैन समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है और भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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