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जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू: लिव-इन कपल को ‘स्थिर संबंध’ मानकर शादीशुदा जोड़ा गिना जाएगा, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल

जनगणना 2027 का पहला चरण 1 अप्रैल से शुरू: लिव-इन कपल को ‘स्थिर संबंध’ मानकर शादीशुदा जोड़ा गिना जाएगा, पूछे जाएंगे ये 33 सवाल

भारत की 16वीं जनगणना (Census 2027) का पहला चरण कल यानी 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है। यह चरण हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस का होगा, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी और सेल्फ-एन्यूमरेशन (स्व-गणना) का विकल्प भी उपलब्ध है।

सबसे चर्चित बात — सरकार ने स्पष्ट किया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल को भी शादीशुदा जोड़ा माना जाएगा, अगर वे अपने रिश्ते को ‘स्थिर संघ’ (stable union) मानते हैं। यह फैसला कपल की अपनी घोषणा पर आधारित होगा। पहले भी कुछ हद तक ऐसा होता था, लेकिन इस बार FAQ में इसे स्पष्ट रूप से लिख दिया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

घर में रहने वाले शादीशुदा जोड़ों की संख्या पूछी जाएगी।

लिव-इन कपल अगर खुद को स्थिर संबंध मानते हैं, तो उन्हें वैवाहिक जोड़े की श्रेणी में गिना जाएगा।

यह बदलाव बदलते सामाजिक ढांचे को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

पहले चरण में पूछे जाएंगे 33 सवाल

सरकार ने हाउसलिस्टिंग के लिए 33 प्रश्न अधिसूचित कर दिए हैं। इनमें मुख्य रूप से घर, सुविधाएं और परिवार की बुनियादी जानकारी शामिल है। कुछ प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:

घर का मकान नंबर, बिल्डिंग नंबर और मालिकाना हक (स्वयं का या किराए का)।

घर की दीवार, फर्श और छत बनाने में इस्तेमाल हुई सामग्री।

घर में रहने वाले कुल लोग और शादीशुदा जोड़ों की संख्या (लिव-इन शामिल)।

घर के मुखिया का लिंग।

परिवार द्वारा मुख्य रूप से खाए जाने वाले अनाज का प्रकार।

बिजली, पानी, शौचालय, रसोई गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच।

आधुनिक सुविधाएं जैसे टेलीविजन, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, कंप्यूटर आदि।

घर में मौजूद वाहनों (कार, बाइक, साइकिल आदि) का प्रकार।

अन्य: घरेलू संपत्ति, सुविधाओं की उपलब्धता आदि।

ये सवाल घर की स्थिति, रहन-सहन और बुनियादी जरूरतों का पूरा आंकड़ा जुटाने के लिए हैं।

जनगणना की प्रक्रिया

पहला चरण (1 अप्रैल – 30 सितंबर 2026): हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस।

दूसरा चरण (फरवरी 2027): आबादी गणना (जनसंख्या गणना), जिसमें जाति आदि का डेटा भी लिया जाएगा।

पहले 15 दिनों में सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प — लोग ऑनलाइन पोर्टल पर खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे (अंग्रेजी और 15 भारतीय भाषाओं में)।

उसके बाद एन्यूमरेटर घर-घर जाकर जानकारी लेंगे।

शुरू में दिल्ली के NDMC क्षेत्र से पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।

ध्यान दें: जनगणना में झूठी जानकारी देना गंभीर अपराध माना जाता है और ₹1000 तक का जुर्माना लग सकता है।

यह जनगणना देश की नीति-निर्माण, विकास योजनाओं और संसाधनों के वितरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। लिव-इन संबंधों को दी गई मान्यता सामाजिक बदलाव का संकेत देती है।

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