ईरान जंग के बीच अल-अक्सा मस्जिद में ‘कुर्बानी’ की तैयारी! भड़के मुसलमान, यरूशलेम में तनाव चरम पर
ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध के साये में यरूशलेम (Jerusalem) की अल-अक्सा मस्जिद को लेकर तनाव चरम पर पहुँच गया है। रमजान के अंत और ईद के बाद अब यह पवित्र स्थल एक नए धार्मिक और राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।
ईरान जंग के बीच अल-अक्सा मस्जिद में ‘कुर्बानी’ की तैयारी! भड़के मुसलमान, यरूशलेम में तनाव चरम पर
यरूशलेम, 30 मार्च 2026: मध्य पूर्व में जारी युद्ध और ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बीच, यरूशलेम की अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque) परिसर में तनाव एक खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। इजरायली अधिकारियों ने “सुरक्षा कारणों” का हवाला देते हुए मस्जिद को पिछले 31 दिनों से मुस्लिम इबादतगुजारों के लिए बंद कर रखा है, लेकिन इसी बीच कट्टरपंथी यहूदी समूहों द्वारा वहां ‘पशु बलि’ (Sacrifice) देने की तैयारियों ने पूरे मुस्लिम जगत में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
विवाद की मुख्य जड़: ‘पासओवर’ और कुर्बानी की मांग
यह विवाद यहूदी त्योहार ‘पासओवर’ (Passover) से जुड़ा है, जो 2 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहा है।
* कट्टरपंथी समूहों की सक्रियता: इजरायल के कुछ चरमपंथी ‘टेंपल माउंट’ संगठनों ने सोशल मीडिया पर AI-जनरेटेड तस्वीरें और विज्ञापन जारी किए हैं, जिनमें अल-अक्सा परिसर (जिसे यहूदी ‘टेंपल माउंट’ कहते हैं) के अंदर बकरे की बलि देते हुए दिखाया गया है।
* इनाम की घोषणा: इन समूहों ने उन लोगों के लिए नकद इनाम की घोषणा की है जो मस्जिद परिसर के अंदर जीवित जानवर ले जाने या वहां कुर्बानी देने में सफल होंगे।
* अल्टर (वेदी) बनाने का दावा: ‘टेंपल इंस्टीट्यूट’ जैसे संगठनों ने दावा किया है कि वे वहां बलि देने के लिए धार्मिक वेदी (Altar) बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
31 दिनों से मस्जिद बंद, मुसलमान क्यों हैं नाराज?
मुस्लिम समुदाय और फिलीस्तीनी नागरिकों का गुस्सा दो मुख्य कारणों से भड़क उठा है:
* दोहरा मापदंड: जहां एक तरफ सुरक्षा का हवाला देकर आम मुसलमानों को रमजान और ईद की नमाज के लिए मस्जिद में प्रवेश नहीं करने दिया गया, वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथी यहूदी समूहों को पुलिस सुरक्षा के बीच परिसर में प्रवेश (Incursions) की अनुमति दी जा रही है।
* यथास्थिति (Status Quo) का उल्लंघन: अल-अक्सा परिसर में किसी भी गैर-मुस्लिम धार्मिक अनुष्ठान या बलि की सख्त मनाही है। मुसलमानों का मानना है कि इजरायल युद्ध की आड़ में मस्जिद की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान बदलने की कोशिश कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चेतावनी
* मुस्लिम देशों का रुख: सऊदी अरब, जॉर्डन, तुर्किये और इंडोनेशिया सहित 8 से अधिक देशों ने इस बंदी और उकसावे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और दुनिया भर के मुसलमानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया है।
* यरूशलेम गवर्नरेट की चेतावनी: यरूशलेम प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि ‘पासओवर’ के दौरान किसी भी तरह की बलि की कोशिश हुई, तो यह पूरे क्षेत्र में हिंसा की एक नई और अनियंत्रित लहर पैदा कर सकता है।
युद्ध का साया
इजरायली पुलिस का कहना है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण यरूशलेम हाई-अलर्ट पर है। हाल ही में ईरान द्वारा दागी गई एक मिसाइल अल-अक्सा मस्जिद के करीब गिरी थी, जिससे परिसर में एक बड़ा गड्ढा हो गया था। इजरायल इसी ‘आपातकाल’ (State of Emergency) का उपयोग करके मस्जिद पर अपना नियंत्रण सख्त कर रहा है।
मौजूदा स्थिति: यरूशलेम की पुरानी सिटी (Old City) के चारों ओर भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स तैनात हैं। मुस्लिम समुदाय ने ‘लोकप्रिय लामबंदी’ (Popular Mobilization) का आह्वान किया है ताकि मस्जिद की घेराबंदी को तोड़ा जा सके।
