राजनीति

बड़ी खबर: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की तैयारी, मई में बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

बड़ी खबर: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन की तैयारी, मई में बुलाया जाएगा संसद का विशेष सत्र

नई दिल्ली: भारत सरकार महिला आरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ में संशोधन के लिए केंद्र सरकार आगामी मई माह में संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। इस संशोधन के जरिए सरकार महिलाओं को आरक्षण का लाभ जल्द से जल्द देने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

क्या है नया मास्टरप्लान?

मौजूदा कानून के अनुसार, महिला आरक्षण को जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन (Delimitation) के बाद लागू किया जाना था। लेकिन अब सरकार इसमें बड़ा बदलाव करने जा रही है:

* 2011 की जनगणना का आधार: सरकार अब इस आरक्षण को 2011 की जनगणना के आधार पर ही लागू करने की योजना बना रही है, ताकि इसमें होने वाली देरी को खत्म किया जा सके।

* विशेष सत्र: वर्तमान सत्र 2 अप्रैल को स्थगित होगा, जिससे पहले सरकार सदन को मई में होने वाले विशेष सत्र की आधिकारिक सूचना देगी।

33 फीसदी आरक्षण का सफर: 1996 से 2023 तक

महिला आरक्षण बिल का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। यह पहली बार 1996 में पेश किया गया था, लेकिन लगभग 27 साल के लंबे इंतजार के बाद सितंबर 2023 में इसे पूर्ण बहुमत से मंजूरी मिली।

बिल का टाइमलाइन चार्ट:

* 1996: पहली बार सदन में पेश (विरोध के कारण वापस)।

* 1998-2003: कई बार पेश हुआ, लेकिन पास नहीं हो सका।

* 2010: राज्यसभा से पास हुआ, लेकिन लोकसभा में अटक गया।

* 2023: संसद के दोनों सदनों से ऐतिहासिक जीत के साथ पारित। (लोकसभा: 454-0, राज्यसभा: 214-0)।

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस संशोधन का सीधा असर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पड़ सकता है।

* वोट बैंक में सेंध: महिला आरक्षण को समय से पहले लागू करने का मुद्दा टीएमसी (TMC) के मजबूत महिला वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है।

* बीजेपी को बढ़त: यदि महिला मतदाता इस पहल के कारण बीजेपी की ओर झुकती हैं, तो बंगाल में सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं प्रबल हो सकती हैं। पिछले चुनावों में भी बीजेपी के वोट प्रतिशत में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी।

मुख्य प्रावधान

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और देश की सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाएंगी। यह कदम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

 

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