उत्तराखंड

देहरादून: होनहार डॉ. तन्वी की मौत का मामला; विभागाध्यक्ष पर प्रताड़ना का आरोप, कार में संदिग्ध हालत में मिला था शव

देहरादून के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में मास्टर ऑफ सर्जरी (MS) की छात्रा डॉ. तन्वी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने देवभूमि और चिकित्सा जगत को स्तब्ध कर दिया है। 24 मार्च (नवरात्रि की षष्ठी) की रात हुई इस घटना में अब ‘मानसिक उत्पीड़न’ और ‘अंकों के खेल’ की परतें खुल रही हैं।

देहरादून: होनहार डॉ. तन्वी की मौत का मामला; विभागाध्यक्ष पर प्रताड़ना का आरोप, कार में संदिग्ध हालत में मिला था शव

हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 23 वर्षीय डॉ. तन्वी, देहरादून के पटेलनगर स्थित एक प्रमुख मेडिकल कॉलेज से नेत्र रोग चिकित्सा (Ophthalmology) में एमएस कर रही थीं। उनकी मौत के तीन दिन बाद भी गुत्थी उलझी हुई है।

1. घटनाक्रम: उस ‘अभागे’ पिता की अंतिम बातचीत

* 24 मार्च की रात: डॉ. तन्वी ने अंबाला में मौजूद अपने पिता ललित मोहन से फोन पर करीब एक घंटे बात की। इस दौरान उन्होंने अपने करियर और कॉलेज में मिल रहे तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई।

* अंतिम मैसेज: रात 11:15 बजे तन्वी ने मैसेज किया कि वह 12:30 बजे तक घर (देहराखास) पहुंच जाएगी, जहाँ वह अपनी मां के साथ रहती थी।

* तलाश और बरामदगी: जब वह घर नहीं पहुंची और फोन बंद आने लगा, तो पिता अंबाला से देहरादून भागे। रात में ही अस्पताल मार्ग के किनारे खड़ी उनकी कार मिली। कार अंदर से लॉक थी, जिसे तोड़कर देखने पर तन्वी अचेत मिलीं। उनके हाथ में ‘कैनुला’ लगा था और कार में इंजेक्शन बरामद हुए। अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

2. विभागाध्यक्ष (HOD) पर गंभीर आरोप

डॉ. तन्वी के पिता ने नेत्र रोग विभागाध्यक्ष के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। उनके आरोपों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

* अंकों का भेदभाव: तन्वी की ‘लॉग बुक’ में पहले अच्छे अंक थे, लेकिन नई विभागाध्यक्ष के आने के बाद उन्हें जानबूझकर कम अंक दिए जाने लगे।

* फेल करने की धमकी: आरोप है कि विभागाध्यक्ष ने तन्वी को कम अंक देकर फेल करने की धमकी दी थी, जिससे वह पिछले 4 महीनों से गहरे तनाव में थीं।

* पिता की गुहार का असर नहीं: तन्वी के पिता ने खुद विभागाध्यक्ष से मिलकर बेटी के भविष्य को प्रभावित न करने की प्रार्थना की थी, लेकिन कथित तौर पर उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

3. पुलिस जांच के मुख्य बिंदु

पुलिस इस मामले को आत्महत्या और हत्या दोनों एंगल से देख रही है, जिसके लिए निम्नलिखित साक्ष्यों का सहारा लिया जा रहा है:

* पोस्टमार्टम रिपोर्ट: मौत की असली वजह (ड्रग ओवरडोज या कुछ और) का पता लगाने के लिए विसरा सुरक्षित रखा जा सकता है।

* कैनुला और इंजेक्शन: कार में मिले मेडिकल उपकरणों की जांच की जा रही है कि क्या तन्वी ने खुद को कोई घातक इंजेक्शन लगाया था।

* कॉल डिटेल और रिकॉर्ड: पिता के साथ हुई अंतिम एक घंटे की बातचीत और कॉलेज के अन्य सहपाठियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

4. मेडिकल शिक्षा में बढ़ता ‘स्ट्रेस’

यह मामला एक बार फिर मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों पर काम के दबाव और फैकल्टी द्वारा किए जाने वाले कथित मानसिक उत्पीड़न की ओर इशारा करता है। एक होनहार डॉक्टर, जो दूसरों की आंखों को रोशनी देने की पढ़ाई कर रही थी, खुद अंधेरे (तनाव) की भेंट चढ़ गई।

परिजनों की मांग: डॉ. तन्वी के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी कायर नहीं थी, उसे हालात और सिस्टम ने इस मोड़ पर लाकर खड़ा किया। वे विभागाध्यक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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