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विमान हादसे: राज्यसभा में पेश रिपोर्ट; 5 साल में 23 दुर्घटनाएं, हेलीकॉप्टर हादसों की दर सबसे अधिक

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में विमान और हेलीकॉप्टर हादसों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े पेश किए हैं। नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने स्पष्ट किया कि पिछले पांच वर्षों में कुल 23 हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की दर में पिछले साल उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।

विमान हादसे: राज्यसभा में पेश रिपोर्ट; 5 साल में 23 दुर्घटनाएं, हेलीकॉप्टर हादसों की दर सबसे अधिक

नई दिल्ली: नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा सोमवार (23 मार्च 2026) को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत में पिछले पांच वर्षों में विमान और हेलीकॉप्टर हादसों की संख्या 23 रही है। आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की दर प्रति 10,000 उड़ान घंटों में 0.53 रही, जो पिछले पांच सालों का उच्चतम स्तर है।

हादसों का सालवार विवरण

पिछले पांच वर्षों में हुए हादसों का ग्राफ कुछ इस प्रकार रहा:

| वर्ष | विमान हादसों की संख्या |

| 2021 | 06 हादसे |

| 2022 | 04 हादसे |

| 2023 | 04 हादसे |

| 2024 | 03 हादसे |

| 2025 | 06 हादसे |

* 2025 का विवरण: पिछले साल कुल 6 हादसों में से 4 हेलीकॉप्टर हादसे थे, जबकि शिड्यूल्ड और नॉन-शिड्यूल्ड फिक्स्ड विंग विमानों में 1-1 हादसा दर्ज किया गया।

DGCA में पदों की कमी और सुरक्षा पर स्पष्टीकरण

सदन में रेगुलेटरी बॉडी DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठा। मंत्री मोहोल ने निम्नलिखित जानकारी साझा की:

* रिक्त पद: DGCA में कुल 1,630 स्वीकृत पदों में से 780 से अधिक पद खाली हैं।

* सुरक्षा पर प्रभाव: सरकार ने स्पष्ट किया कि मानव संसाधन की इस कमी का सुरक्षा कार्यों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है, क्योंकि एक व्यवस्थित सुरक्षा निगरानी तंत्र मौजूद है।

* भर्ती प्रक्रिया: * हाल ही में 167 उम्मीदवारों का चयन किया गया है।

* 106 को नियुक्ति पत्र जारी किए जा चुके हैं।

* UPSC के माध्यम से रिजर्व पैनल से 42 अधिकारियों की भर्ती का अनुरोध किया गया है।

* साल 2026 के लिए 82 तकनीकी पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया जारी है।

अस्थायी समाधान

जब तक स्थायी भर्तियां पूरी नहीं होतीं, तब तक खाली पदों को अल्पकालिक संविदात्मक (Contractual) नियुक्तियों के जरिए भरा जा रहा है ताकि विमानन सुरक्षा के मानकों में कोई कमी न आए।

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