देहरादून की हवा हुई ‘प्योर’: 5 साल का टूटा रिकॉर्ड, AQI लुढ़ककर पहुंचा 6 पर
देहरादून के लिए पर्यावरण के मोर्चे पर एक बहुत ही सुखद और रिकॉर्ड तोड़ने वाली खबर सामने आई है। शहर की हवा पिछले 5 सालों में सबसे स्वच्छ स्तर पर पहुंच गई है।
देहरादून की हवा हुई ‘प्योर’: 5 साल का टूटा रिकॉर्ड, AQI लुढ़ककर पहुंचा 6 पर
देहरादून: पहाड़ों की रानी मसूरी की तलहटी में बसे देहरादून ने प्रदूषण के खिलाफ जंग में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पिछले 72 घंटों से हो रही लगातार बारिश और उसके बाद खिली चटक धूप ने दून की आबोहवा को पूरी तरह बदल दिया है। शनिवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गिरकर मात्र 6 दर्ज किया गया, जो ‘बेहतरीन’ (Good) श्रेणी में आता है।
पिछले 5 वर्षों का सबसे निचला स्तर
यह सुधार इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि पिछले कुछ समय से देहरादून की तुलना दिल्ली जैसे प्रदूषित शहरों से होने लगी थी। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह पिछले 5 साल का सबसे बेहतर स्तर है:
* 2026 (वर्तमान): AQI 6
* 2025: AQI 25
* 2023-24: AQI 21
* 2022: AQI 20
तुलना: कुछ दिनों पहले तक दून का AQI 300 से 350 के बीच झूल रहा था, जो सेहत के लिए ‘बेहद खराब’ माना जाता है।
कैसे हुआ यह चमत्कार?
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, इस सुधार के पीछे मुख्य रूप से ‘कुदरत का हाथ’ है:
* लगातार बारिश: पिछले तीन दिनों की वर्षा ने हवा में मौजूद धूल के कणों और हानिकारक प्रदूषकों (PM2.5 और PM10) को धोकर जमीन पर बैठा दिया।
* धूप और साफ आसमान: बारिश के बाद निकली तेज धूप ने वातावरण की दृश्यता (Visibility) बढ़ा दी है, जिससे अब शहर से हिमालय की पहाड़ियां साफ नजर आने लगी हैं।
* पहाड़ों पर बर्फबारी: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों की हवा को शुद्ध करने में मददगार साबित हुआ।
विशेषज्ञों की राय: राहत लेकिन चेतावनी भी
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर ने इस सुधार को सकारात्मक बताया है, लेकिन साथ ही एक चेतावनी भी दी है:
* अस्थाई सुधार: यह सुधार मौसम पर आधारित है। जैसे ही मौसम शुष्क (Dry) होगा, धूल और धुएं के कारण AQI फिर से बढ़ सकता है।
* स्थायी उपायों की जरूरत: विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बारिश के भरोसे रहने के बजाय शहर में वाहनों और निर्माण कार्यों से होने वाले प्रदूषण पर स्थायी लगाम लगाना जरूरी है।
दूनवासियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
साफ हवा का असर शहर की सड़कों और पार्कों में भी दिखने लगा है। सुबह की सैर पर निकलने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है। सांस की बीमारियों और आंखों में जलन की शिकायतों से जूझ रहे लोगों के लिए यह ठंडी और शुद्ध हवा किसी वरदान से कम नहीं है।
