मिडिल ईस्ट जंग पर PM मोदी ने की हाई-लेवल बैठक! ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति पर गहन मंथन, बैठक 3.5 घंटे चली
मिडिल ईस्ट जंग पर PM मोदी ने की हाई-लेवल बैठक! ऊर्जा सुरक्षा, तेल-गैस आपूर्ति पर गहन मंथन, बैठक 3.5 घंटे चली
मिडिल ईस्ट (वेस्ट एशिया) में US-इज़राइल vs ईरान युद्ध के 23वें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शाम प्रधानमंत्री आवास पर एक अहम हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक करीब 3.5 घंटे चली, जिसमें पेट्रोलियम, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, बिजली और उर्वरक (फर्टिलाइजर) क्षेत्रों की स्थिति की विस्तृत समीक्षा हुई। बैठक का मुख्य फोकस देश में ईंधन, बिजली और खाद की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना, लॉजिस्टिक्स स्थिर रखना और वितरण को सुचारू बनाना रहा।
किन मुद्दों पर हुआ मंथन?
होर्मुज स्ट्रेट संकट और ग्लोबल सप्लाई चेन में डिसरप्शन से भारत पर पड़ने वाला असर।
क्रूड ऑयल की कीमतें $115+ पर पहुंचने से पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और पावर सेक्टर पर प्रभाव।
उर्वरक की उपलब्धता और किसानों पर असर (खाद की कमी से फसल चक्र प्रभावित हो सकता है)।
लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन — देशभर में स्टॉक, राशनिंग की जरूरत और अल्टरनेटिव रूट्स (जैसे रूस, अमेरिका से इंपोर्ट बढ़ाना)।
प्रोएक्टिव स्टेप्स — स्टॉक बढ़ाना, कमर्शियल LPG का 20% एक्स्ट्रा अलॉटमेंट (पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने कल ही घोषणा की), और इंडस्ट्री-कंज्यूमर इंटरेस्ट प्रोटेक्शन।
ग्लोबल मॉनिटरिंग — युद्ध की हर घटना पर नजर, ताकि कोई बड़ा डिसरप्शन न हो।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, पावर मंत्री मनोहर लाल खट्टर, और NSA अजीत डोभाल।
अन्य: पोर्ट्स एंड शिपिंग मंत्री सरबनंदा सोनोवाल, फूड एंड कंज्यूमर अफेयर्स मंत्री प्रल्हाद जोशी, सिविल एविएशन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू आदि।
PMO के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा और शक्तिकांत दास भी मौजूद रहे।
PM मोदी का स्टैंड:
PM ने पहले ही कहा था कि वेस्ट एशिया युद्ध से ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस है, और भारत को शांति, धैर्य और जागरूकता से सामना करना होगा।
बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि कंज्यूमर और इंडस्ट्री के हितों की रक्षा हो, और सप्लाई चेन डिसरप्शन से निपटने के लिए लगातार प्रयास जारी रहें।
हाल ही में PM ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बात की, जहां उन्होंने क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की निंदा की और नेविगेशन की फ्रीडम (होर्मुज स्ट्रेट खुला रखना) पर जोर दिया।
यह बैठक युद्ध शुरू होने के बाद तीसरी ऐसी हाई-लेवल मीटिंग है। सरकार का फोकस है कि श्रीलंका जैसा ईंधन संकट (400+ रुपये/लीटर) भारत में न आए। आने वाले दिनों में और स्टेप्स जैसे राशनिंग या इंपोर्ट बढ़ाने की संभावना। क्या यह बैठक बड़े फैसलों की शुरुआत है? दुनिया की नजरें भारत की एनर्जी स्ट्रैटेजी पर!
