उत्तराखंड विधानसभा: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सरकार पर तीखा प्रहार, भ्रष्टाचार और ‘सत्र की अवधि’ पर उठाए सवाल
उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भ्रष्टाचार और सत्र की अवधि जैसे गंभीर विषयों पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
उत्तराखंड विधानसभा: नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य का सरकार पर तीखा प्रहार, भ्रष्टाचार और ‘सत्र की अवधि’ पर उठाए सवाल
उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र में विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा सरकार जानबूझकर सदन की अवधि कम रख रही है ताकि वह विपक्ष के तीखे सवालों और भ्रष्टाचार के मुद्दों से बच सके।
“सत्र की अवधि बढ़ाना जरूरी, 40 विभागों पर कभी नहीं हुई चर्चा”
यशपाल आर्य ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठकों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष ने बार-बार सत्र की अवधि बढ़ाने की मांग की थी। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:
* 21 दिन के सत्र की मांग: विपक्ष ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया था कि सत्र कम से कम 21 दिन का हो, जिसमें तीन सोमवार शामिल हों, ताकि जनहित के मुद्दों पर विस्तार से बात हो सके।
* अधूरे सवाल: आर्य ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के पास मौजूद 40 महत्वपूर्ण विभागों पर पिछले 9 सत्रों में कभी चर्चा ही नहीं हो पाई। सरकार के पास विपक्ष के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है।
* नियमों की अनदेखी: उन्होंने कहा कि सदन में जब भी प्रश्न उठाए जाते हैं, तो सरकार नियमों का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेती है और गतिरोध समाप्त करने का प्रयास नहीं करती।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: “जल, जंगल और जमीन को खुर्द-बर्द कर रही सरकार”
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार को एक ‘ज्वलंत प्रश्न’ बताया। उन्होंने कुछ विशिष्ट मामलों का जिक्र करते हुए सरकार पर साजिश रचने का आरोप लगाया:
* जमीन घोटाला: सरकार पर जल विद्युत परियोजनाओं और पर्यटन विकास परिषद की बेशकीमती जमीनों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया गया।
* जॉर्ज एवरेस्ट मामला: मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट की जमीन, जिसकी बाजार कीमत लगभग 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक है, उसे मामूली किराए पर एक निजी कंपनी को देने का मुद्दा उठाया।
* यमुना कॉलोनी: चकराता रोड स्थित यमुना कॉलोनी की जमीनों को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए।
* अधिकारियों का एकाधिकार: आर्य ने एक ही अधिकारी को ऊर्जा सचिव, नियोजन सचिव और UIIPP का प्रबंध निदेशक बनाए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “एक हाथ से जमीनें ली जा रही हैं और दूसरे हाथ से चहेतों को सौंपी जा रही हैं।”
कानून व्यवस्था और जनमुद्दे
यशपाल आर्य ने स्पष्ट किया कि प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कार्य संचालन नियमावली को नहीं मानती और विपक्ष की आवाज को दबाने के लिए सदन को बाधित करने की नियत रखती है।
“सरकार सदन चलाना ही नहीं चाहती। भ्रष्टाचार आज सबकी जुबान पर है, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय भाग रही है। उत्तराखंड की अनमोल संपदा को खुर्द-बर्द किया जा रहा है, जिसे विपक्ष बर्दाश्त नहीं करेगा— यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष
बजट सत्र के दौरान विपक्ष के इन कड़े तेवरों से साफ है कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर सियासत और गरमाएगी। जहां सरकार अपने बजट को विकासोन्मुखी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे घोटालों और अव्यवस्थाओं को छिपाने वाला ‘छलावा’ करार दे रहा है।
