राजनीति

राज्यसभा चुनाव: हरियाणा कांग्रेस को सता रहा है ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर, हिमाचल के रिसॉर्ट में विधायकों की ‘किलाबंदी’

2016 (आरके आनंद पेन कांड) और 2022 (अजय माकन की हार) के अनुभवों ने कांग्रेस को इस कदर सतर्क कर दिया है कि वह अपने 31 विधायकों को हिमाचल की वादियों में ‘सुरक्षित’ रखने पर मजबूर है।

राज्यसभा चुनाव: हरियाणा कांग्रेस को सता रहा है ‘क्रॉस वोटिंग’ का डर, हिमाचल के रिसॉर्ट में विधायकों की ‘किलाबंदी’

हरियाणा की राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। जीत के लिए पर्याप्त आंकड़े होने के बावजूद कांग्रेस कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। यही वजह है कि पार्टी ने अपने 31 विधायकों को चंडीगढ़ से दूर हिमाचल प्रदेश के कुफरी स्थित ‘द ट्वीन टावर्स’ रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है।

सतीश नांदल ने बिगाड़ा समीकरण

बीजेपी उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पेच दूसरी सीट पर फंसा है। कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। गणित के हिसाब से कांग्रेस के 37 विधायक उनकी जीत के लिए काफी हैं, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल (73 करोड़ की संपत्ति के साथ सबसे अमीर प्रत्याशी) के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। नांदल को जीतने के लिए 9 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है, जो बिना सेंधमारी के मुमकिन नहीं है।

क्यों डरी हुई है कांग्रेस? (इतिहास के जख्म)

कांग्रेस की इस घेराबंदी के पीछे पिछले दो राज्यसभा चुनावों के कड़वे अनुभव हैं:

* 2016 का ‘पेन कांड’: गलत पेन के इस्तेमाल से 14 कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द हुए और आरके आनंद हार गए।

* 2022 की हार: कुलदीप बिश्नोई और किरण चौधरी की क्रॉस वोटिंग के कारण अजय माकन को कार्तिकेय शर्मा से हार का सामना करना पड़ा।

कौन से 6 विधायक नहीं गए कुफरी?

भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में हुई बैठक के बाद 31 विधायक शिमला रवाना हुए, जबकि 6 विधायक निजी कारणों से नहीं जा सके:

* भूपेंद्र सिंह हुड्डा: विपक्ष के नेता।

* विनेश फोगाट: जुलाना विधायक (पारिवारिक कारण)।

* कुलदीप वत्स, परमवीर सिंह, मोहम्मद इलियास, और चंद्रमोहन: बीमारी या पारिवारिक समारोहों के कारण चंडीगढ़ में ही रुक गए।

कड़ी सुरक्षा और मेहमाननवाजी

कुफरी के रिसॉर्ट में हिमाचल पुलिस का कड़ा पहरा है। मेजबानी की कमान खुद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू संभाले हुए हैं। वहीं, ओडिशा के 14 कांग्रेस विधायकों की जिम्मेदारी कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को सौंपी गई है, जिन्हें कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है।

निष्कर्ष:

अब सभी की नजरें 16 मार्च (सोमवार) पर टिकी हैं, जब इन विधायकों को सीधे वोटिंग के लिए चंडीगढ़ लाया जाएगा। क्या कांग्रेस इस बार अपनी एकजुटता बचा पाएगी या सतीश नांदल कोई नया ‘खेला’ करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *