सिर्फ ₹33,000 में बनी पूरी फिल्म: ‘तुम्बाड’ फेम अनिल बर्वे की ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर आउट; AI और मोबाइल से रचा इतिहास
‘तुम्बाड’ जैसी कालजयी फिल्म से हॉरर सिनेमा की परिभाषा बदलने वाले निर्देशक राही अनिल बर्वे एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर रिलीज कर पूरी फिल्म इंडस्ट्री को हैरान कर दिया है। चौंकाने वाली बात फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उसे बनाने का तरीका और उसका बजट है।
सिर्फ ₹33,000 में बनी पूरी फिल्म: ‘तुम्बाड’ फेम अनिल बर्वे की ‘मन पिशाच’ का ट्रेलर आउट; AI और मोबाइल से रचा इतिहास
मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो जब किसी स्थापित निर्देशक ने एक पूरी फिल्म किसी स्मार्टफोन की कीमत से भी कम बजट में तैयार कर दी हो। ‘तुम्बाड’ के निर्देशक अनिल बर्वे ने ‘मन पिशाच’ के जरिए यह कारनामा कर दिखाया है। शनिवार को जारी हुए इस फिल्म के ट्रेलर ने अपनी डरावनी विजुअल्स और फोक-हॉरर (Folk Horror) थीम से दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए हैं।
कैसे हुआ यह ‘असंभव’ प्रयोग?
अनिल बर्वे ने सोशल मीडिया पर फिल्म के निर्माण की जो प्रक्रिया साझा की है, वह किसी भी उभरते हुए फिल्ममेकर के लिए मिसाल है।
* बजट: पूरी फिल्म का निर्माण खर्च मात्र 33,000 रुपये आया।
* टेक्नोलॉजी: 80 मिनट की इस फिल्म को घर के कंप्यूटर (Home PC) पर तैयार किया गया है।
* शूटिंग: कलाकारों के अभिनय को किसी भारी-भरकम कैमरे के बजाय मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया गया।
* टूल्स: फिल्म को बनाने में फोटोशॉप, जनरेटिव AI टूल्स, एडोब आफ्टर इफेक्ट्स और हाथ से बनाए गए स्टोरीबोर्ड का इस्तेमाल हुआ है।
क्या है ‘मन पिशाच’ की कहानी?
यह एक साइकोलॉजिकल फोक हॉरर फिल्म है।
* ट्रेलर के अनुसार, कहानी एक ऐसे नायक के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक प्राचीन मंदिर की खोज में निकलता है।
* अपनी इस रहस्यमयी यात्रा के दौरान उसका सामना ऐसी प्राचीन और भयानक शक्तियों (राक्षसों और भूतों) से होता है, जिन्हें देख रूह कांप जाती है।
* फिल्म में केवल दो कलाकार हैं— यानिया भारद्वाज और दीपक दामले।
फिल्म बनाने के पीछे का विजन
अनिल बर्वे ने बताया कि इस प्रयोग के पीछे एक बुनियादी सवाल था— “क्या आर्थिक रूप से कमजोर फिल्म निर्माता अकेले दम पर पूरी फिल्म बना सकता है?” उन्होंने लिखा कि इसके लिए सिर्फ कल्पना, धैर्य और अटूट जुनून की जरूरत है। अगर इसे देखकर कोई एक संघर्षरत कलाकार भी प्रेरित होता है, तो यह प्रयोग सफल है।
विशेष बात: हाल ही में ‘मायासभा’ रिलीज करने के बाद, अनिल बर्वे की ‘मन पिशाच’ यह साबित करती है कि सिनेमा केवल पैसे से नहीं, बल्कि विजन से बनता है। फिल्म का एक-एक फ्रेम इतना डरावना है कि यह बड़े बजट की हॉरर फिल्मों को मात देता दिख रहा है।
