उत्तराखंड

उत्तराखंड विधानसभा में अल्पसंख्यक, मदरसा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों की गूंज तेज हो गई है – क्या BJP 2027 विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पिच तैयार कर रही है?

उत्तराखंड विधानसभा में अल्पसंख्यक, मदरसा और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दों की गूंज तेज हो गई है – क्या BJP 2027 विधानसभा चुनावों के लिए अपनी पिच तैयार कर रही है?

गैरसैंण (उत्तराखंड): बजट सत्र के दौरान सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर BJP विधायकों तक की तरफ से अल्पसंख्यक मामलों, मदरसा बोर्ड और जनसंख्या नियंत्रण पर आक्रामक बयानबाजी ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्ष (कांग्रेस, अन्य) इसे “सांप्रदायिक ध्रुवीकरण” बता रहा है, जबकि BJP इसे “राष्ट्रीय हित” और “समानता” का मुद्दा कह रही है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये सब 2027 विधानसभा चुनावों की तैयारी का हिस्सा है?

सदन में क्या-क्या हुआ?

मदरसा बोर्ड पर हमला: सरकार पहले से ही मदरसा बोर्ड को समाप्त करने की प्रक्रिया में है (राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाकर पारदर्शिता लाने का दावा)। मुख्यमंत्री धामी ने सदन में कहा कि मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ये जरूरी है – अनरजिस्टर्ड मदरसे बंद होंगे।

जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग: BJP विधायक शिव अरोड़ा (रुद्रपुर) ने नियम 300 के तहत ध्यान आकर्षण में कहा कि राज्य में “डेमोग्राफी चेंज” (जनसांख्यिकीय बदलाव) एक विशेष वर्ग द्वारा हो रहा है। उन्होंने “हम पांच हमारे पच्चीस” जैसे अभियान का जिक्र कर चिंता जताई और मांग की कि जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए – तीन बच्चों से ज्यादा वाले परिवारों को सरकारी योजनाओं (राशन, आयुष्मान कार्ड, मकान, गैस सिलेंडर आदि) से वंचित किया जाए।

अल्पसंख्यक शिक्षा पर बिल: कैबिनेट ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान अधिनियम 2025 को सदन में पेश करने का फैसला लिया – अब सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी को भी अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा मिलेगा, लेकिन पारदर्शी प्रक्रिया से।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने शिव अरोड़ा के बयान को “बीजेपी की बीमार मानसिकता” बताया। विपक्ष का आरोप है कि ये मुद्दे उठाकर BJP अल्पसंख्यक वोटों को ध्रुवीकृत कर रही है और 2027 चुनावों में “हिंदुत्व एजेंडा” को मजबूत करना चाहती है।

2027 चुनावों के लिए BJP की पिच?

उत्तराखंड में BJP लगातार दूसरी बार सत्ता में है, और 2027 में तीसरी जीत का लक्ष्य है।

पहले UCC (Uniform Civil Code) लागू किया, अब मदरसा बोर्ड खत्म करने और जनसंख्या नियंत्रण जैसे मुद्दे उठाकर पार्टी “समानता और राष्ट्रीय सुरक्षा” का नैरेटिव बना रही है।

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये मुद्दे उत्तराखंड की 70 सीटों में हिंदू वोटों को मजबूत करने के लिए हैं, जहां अल्पसंख्यक (मुस्लिम) आबादी करीब 14% है।

BJP संगठन और सरकार एक साथ “विकास रथ यात्रा” जैसे अभियान चलाने की तैयारी में हैं – अप्रैल से शुरू हो सकती है।

ये सब UCC की सफलता के बाद का “नेक्स्ट लेवल” लगता है – जनसंख्या नियंत्रण कानून कई BJP शासित राज्यों में चर्चा में है (असम, UP आदि)।

संक्षेप में, सदन में ये चर्चा सिर्फ बजट सत्र की नहीं – बल्कि 2027 की चुनावी रणनीति का शुरुआती दौर लग रही है। BJP इसे “राष्ट्रीय हित” बता रही है, जबकि विपक्ष “ध्रुवीकरण” कह रहा है। क्या आपको लगता है जनसंख्या नियंत्रण कानून उत्तराखंड में आना चाहिए, या ये राजनीतिक खेल है? कमेंट में बताएं।

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