राजनीति

संसदीय संग्राम: “माइक को बनाया जा रहा है अस्त्र”, अविश्वास प्रस्ताव पर गौरव गोगोई का तीखा प्रहार

संसदीय संग्राम: “माइक को बनाया जा रहा है अस्त्र”, अविश्वास प्रस्ताव पर गौरव गोगोई का तीखा प्रहार

लोकसभा में आज लोकतंत्र के मंदिर की गरिमा और संसदीय परंपराओं को लेकर एक अभूतपूर्व बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में भारी हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर विपक्ष की ओर से मोर्चा संभालते हुए गौरव गोगोई ने सरकार और अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

“यह व्यक्ति के खिलाफ नहीं, व्यवस्था के खिलाफ है”

चर्चा की शुरुआत करते हुए गौरव गोगोई ने स्पष्ट किया कि विपक्ष का यह कदम किसी व्यक्ति विशेष (ओम बिरला) के प्रति द्वेष नहीं है। उन्होंने कहा:

“हमें यह प्रस्ताव लाने में रत्ती भर भी खुशी नहीं है, लेकिन जब सदन की गरिमा और संविधान खतरे में हो, तो हमें इस ‘राजधर्म’ का पालन करना ही पड़ता है। यह लड़ाई संसदीय लोकतंत्र को बचाने की है।”

माइक और म्यूट: विपक्ष का सबसे बड़ा आरोप

गोगोई ने सदन के संचालन के दौरान तकनीकी नियंत्रण के दुरुपयोग का मुद्दा उठाते हुए ‘माइक’ को एक अस्त्र (Weapon) करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर अध्यक्ष की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा:

* आवाज दबाने की रणनीति: “आज लोकसभा में माइक को एक लोकतांत्रिक उपकरण के बजाय विपक्ष के खिलाफ एक अस्त्र की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।”

* नेता प्रतिपक्ष की अनदेखी: गोगोई ने आरोप लगाया कि जब भी नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी या अन्य विपक्षी नेता बेरोजगारी, महंगाई या संवैधानिक मुद्दों पर बोलना चाहते हैं, तो अक्सर उनके माइक बंद (Mute) कर दिए जाते हैं या कैमरा एंगल बदल दिया जाता है।

* जनता के विश्वास का हनन: उन्होंने तर्क दिया कि यदि संसद में जनता के प्रतिनिधियों की आवाज ही नहीं गूंजेगी, तो सदन में जनता का विश्वास कैसे कायम रहेगा?

सत्ता पक्ष का पलटवार

विपक्ष के इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई। बीजेपी सांसदों ने इसे ‘स्पीकर के पद का अपमान’ बताते हुए कहा कि ओम बिरला ने हमेशा नियमों के तहत सदन चलाया है। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विपक्ष अपनी हार और प्रासंगिकता खोने के डर से संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहा है।

अगले कदम और वोटिंग का गणित

* 11 मार्च की तैयारी: कल यानी बुधवार को इस प्रस्ताव पर मतदान (Voting) होना है।

* बीजेपी का व्हिप: जैसा कि पहले बताया गया, बीजेपी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी कर दिया है।

* संख्या बल: आंकड़ों के लिहाज से एनडीए (NDA) के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे प्रस्ताव के गिरने की पूरी संभावना है। हालांकि, विपक्ष इस चर्चा के जरिए जनता के बीच ‘लोकतंत्र बचाओ’ का संदेश देने की कोशिश कर रहा है।

आज की बहस का सार: सदन में आज ‘नियमों की किताब’ बनाम ‘लोकतांत्रिक व्यवहार’ की जंग साफ दिखाई दी। जहां विपक्ष ने ‘माइक म्यूट’ को मुद्दा बनाया, वहीं सत्ता पक्ष ने इसे अध्यक्ष की छवि धूमिल करने की साजिश करार दिया।

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