चलती ट्रेन में आशुतोष महाराज पर जानलेवा हमला: नाक काटने की कोशिश, टॉयलेट में बंद होकर बचाई जान – प्रयागराज जा रहे थे!
चलती ट्रेन में आशुतोष महाराज पर जानलेवा हमला: नाक काटने की कोशिश, टॉयलेट में बंद होकर बचाई जान – प्रयागराज जा रहे थे!
न्यूज़ अपडेट: 8 मार्च 2026
उत्तर प्रदेश में बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है! आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज (जिन्हें आशुतोष महाराज कहा जाता है) पर आज तड़के रीवा एक्सप्रेस ट्रेन में जानलेवा हमला हुआ। वे गाजियाबाद से प्रयागराज जा रहे थे, जहां इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न (बटुकों से संबंधित) के केस की सुनवाई होनी थी। हमला कौशांबी जिले के सिराथू रेलवे स्टेशन के पास सुबह करीब 5 बजे हुआ।
क्या हुआ घटना में?
आशुतोष महाराज फर्स्ट एसी कोच में सफर कर रहे थे।
वे ट्रेन के टॉयलेट (बाथरूम) गए, तभी एक अज्ञात हमलावर ने धारदार हथियार (उस्तरा या चाकू) से उन पर हमला कर दिया।
हमलावर ने उनकी नाक काटने की कोशिश की और चेहरे तथा हाथों पर कई वार किए। काफी खून बहा, गंभीर चोटें आईं।
आशुतोष महाराज ने किसी तरह खुद को बचाकर ट्रेन के टॉयलेट में बंद कर लिया। वे लहूलुहान हालत में प्रयागराज पहुंचे।
प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है – डॉक्टरों ने कहा कि हालत अब खतरे से बाहर है, लेकिन चोटें गंभीर हैं।
आशुतोष महाराज का आरोप और बैकग्राउंड
आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बटुकों (बच्चों) से यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर झूंसि पुलिस स्टेशन में FIR कराई थी।
उन्होंने हमले को साजिश बताया और कहा कि यह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद या उनके समर्थकों की तरफ से किया गया।
आशुतोष ने पहले ऐलान किया था कि “जो मेरी नाक काटेगा, उसे 21 लाख रुपये इनाम” – उन्होंने इसे “हिंदू साजिश” बताया।
पुलिस ने GRP प्रयागराज में मामला दर्ज कर लिया है। CCTV फुटेज जांच की जा रही है, हमलावर की तलाश जारी है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
यह मामला धार्मिक विवादों को और भड़का सकता है, क्योंकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एक प्रमुख शंकराचार्य हैं।
सोशल मीडिया पर #JusticeForAshutosh और #AttackOnAshutosh ट्रेंड कर रहा है। कई लोग इसे “धार्मिक असहिष्णुता” या “साजिश” बता रहे हैं।
पुलिस ने जांच शुरू कर दी है – हमलावर की पहचान और गिरफ्तारी की उम्मीद है।
यह घटना ट्रेन में सुरक्षा और धार्मिक विवादों के बीच हिंसा के खतरे को फिर से उजागर करती है। आशुतोष महाराज की हालत स्थिर है, लेकिन मामला संवेदनशील है।
