ईरान ने चुन लिया नया सुप्रीम लीडर? मशहद के इमाम का बड़ा दावा – ऐलान होना बाकी, लेकिन अफवाहें तेज!
ईरान ने चुन लिया नया सुप्रीम लीडर? मशहद के इमाम का बड़ा दावा – ऐलान होना बाकी, लेकिन अफवाहें तेज!
न्यूज़ अपडेट: 8 मार्च 2026
ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत (28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों में) के बाद नए नेता की नियुक्ति को लेकर अटकलें और दावे तेज हो गए हैं। आज मशहद (ईरान का पवित्र शहर, जहां इमाम रजा की दरगाह है) के जुमे की नमाज के इमाम अहमद आलमोलहोदा (Ahmad Alamolhoda) ने बड़ा दावा किया है कि देश के अगले सुप्रीम लीडर का चयन हो चुका है – मतदान पूरा हो गया है, और फैसला बदलना संभव नहीं। लेकिन ऑफिशियल ऐलान अभी बाकी है!
मशहद इमाम का पूरा दावा क्या है?
आलमोलहोदा ने कहा: “एक्सपर्ट्स असेंबली (Assembly of Experts) ने वोटिंग पूरी कर ली है। नए सुप्रीम लीडर का नाम तय हो चुका है। यह फैसला संविधान के मुताबिक है और इसे अब कोई नहीं बदल सकता।”
उन्होंने दावा किया कि असेंबली के कुछ सदस्यों के बीच अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि प्रक्रिया अभी चल रही है – ये “पूरी तरह गलत” हैं।
फैसला अभी असेंबली के सेक्रेटरीट हेड आयतुल्लाह हुसैनी बुशेहरी (Ayatollah Hosseini Bushehri) के पास है, और जल्द ऐलान होगा।
यह दावा युद्ध के बीच आया है, जहां ईरान अमेरिका-इजरायल के हमलों से जूझ रहा है। इमाम ने कहा कि नया लीडर “देश को मजबूत बनाएगा और दुश्मनों से बदला लेगा”।
क्या नए लीडर का नाम सामने आया?
अभी तक कोई ऑफिशियल नाम नहीं आया है। लेकिन कई रिपोर्ट्स और सोर्सेज (Iran International, Israeli media, Wikipedia अपडेट्स) के मुताबिक:
मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei – खामेनेई के बेटे) सबसे मजबूत दावेदार हैं। IRGC (रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स) का दबाव है कि उन्हें ही चुना जाए।
कुछ रिपोर्ट्स में 3-5 मार्च को ही चुनाव हुआ और मोजतबा चुने गए, लेकिन युद्ध और सिक्योरिटी रिस्क के कारण ऐलान डिले है (क्योंकि ऐलान होते ही वो टारगेट बन सकते हैं)।
अन्य नाम: आयतुल्लाह अली रजा आराफी (Alireza Arafi – इंटरिम लीडर के तौर पर चर्चा), हसन खुमैनी (Ruhollah Khomeini के पोते), आदि।
ईरान की विदेश मंत्री और अन्य ऑफिशियल्स ने कहा है कि प्रक्रिया “जल्द” पूरी होगी, शायद कुछ दिनों में।
क्यों ऐलान में देरी?
युद्ध जारी है – अमेरिका-इजरायल के हमले तेज, ईरान जवाबी मिसाइलें दाग रहा है।
सिक्योरिटी चिंता: नया लीडर ऐलान होते ही वो बड़ा टारगेट बन सकता है।
इंटरनल कलह: कुछ क्लेरिक्स “वंशवाद” (hereditary rule – बेटे को चुनना) के खिलाफ हैं।
खामेनेई की मौत के बाद 40 दिनों का मातम चल रहा है, और दफन मशहद में होना है – ऐलान शायद मातम के बाद।
ईरान में सुप्रीम लीडर चुनने का काम Assembly of Experts (86 सदस्यों वाली क्लेरिकल बॉडी) करती है – ये फैसला गुप्त होता है, और आम जनता को सिर्फ ऐलान पर पता चलता है। फिलहाल स्थिति अनिश्चित है, लेकिन मशहद इमाम का दावा अफवाहों को और हवा दे रहा है।
