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बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: कर्नाटक में 16 साल और आंध्र में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर पाबंदी का ऐलान!

बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन: कर्नाटक में 16 साल और आंध्र में 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर पाबंदी का ऐलान!

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल लत से बचाव के लिए दो बड़े राज्यों ने सख्त कदम उठाए हैं! कर्नाटक सरकार ने 2026-27 बजट में घोषणा की है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, X, यूट्यूब आदि) का इस्तेमाल पूरी तरह बैन रहेगा। वहीं आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन का ऐलान किया है, और कुछ रिपोर्ट्स में इसे 16 साल तक बढ़ाने की भी बात कही जा रही है।

ये फैसले ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित हैं, जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन लागू है। दोनों राज्य बच्चों में बढ़ती स्क्रीन एडिक्शन, मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स, साइबरबुलिंग, अकादमिक परफॉर्मेंस में गिरावट और हानिकारक कंटेंट के एक्सपोजर को रोकने के लिए ये कदम उठा रहे हैं।

कर्नाटक का ऐलान (16 साल से कम):

CM सिद्धारमैया ने बजट भाषण में कहा: “बढ़ते मोबाइल यूज के नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन लगाया जाएगा।”

यह भारत का पहला राज्य बन गया है जहां इतना साफ-साफ बैन घोषित हुआ है।

पहले से ही सरकार वाइस चांसलर्स, पैरेंट्स और एक्सपर्ट्स से राय ले रही थी।

लागू होने पर प्लेटफॉर्म्स को सख्त एज वेरिफिकेशन करनी होगी, लेकिन इम्प्लीमेंटेशन का रोडमैप अभी फाइनल नहीं – स्कूलों, पैरेंट्स और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ेगी।

पहले फरवरी 2026 में मोबाइल फोन बैन पर चर्चा हुई थी, अब बजट में सोशल मीडिया पर फोकस।

आंध्र प्रदेश का ऐलान (13 साल से कम, संभवतः 16 तक):

CM नायडू ने नई डिजिटल सेफ्टी पॉलिसी के तहत 13 साल से कम बच्चों पर सोशल मीडिया बैन घोषित किया।

कुछ रिपोर्ट्स में 90 दिनों में लागू होने और उम्र सीमा को 16 साल तक बढ़ाने की बात।

IT मंत्री नारा लोकेश ने पहले ऑस्ट्रेलिया मॉडल का जिक्र कर कहा था कि बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचाना जरूरी है।

राज्य में GoM (ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स) बना है, जो फेक न्यूज, ऑनलाइन अब्यूज और बच्चों की सुरक्षा पर काम कर रहा है।

लक्ष्य: बच्चों की अटेंशन स्पैन, एजुकेशन और मेंटल हेल्थ को बचाना।

विशेषज्ञों की राय और चुनौतियां:

फायदे: बच्चों में एडिक्शन कम होगी, बेहतर पढ़ाई, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ेगी, साइबर क्राइम घटेगा।

चुनौतियां: इम्प्लीमेंटेशन मुश्किल – VPN, फेक एज, पैरेंटल कंट्रोल बायपास हो सकता है। क्या स्कूलों में सख्ती होगी या टेक प्लेटफॉर्म्स पर? कई एक्सपर्ट्स कहते हैं कि बैन से बेहतर रेगुलेशन और एजुकेशन बेहतर।

अन्य राज्य जैसे गोवा भी विचार कर रहे हैं, और केंद्र स्तर पर भी डिबेट चल रही है।

ये फैसले बच्चों के डिजिटल फ्यूचर को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम हैं, लेकिन सफलता इम्प्लीमेंटेशन पर निर्भर करेगी। पैरेंट्स, क्या आप अपने बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन सपोर्ट करते हैं? कमेंट में बताएं!

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