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ईरान का ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’: फारस की खाड़ी में अमेरिकी टैंकर पर मिसाइल स्ट्राइक, धधक उठा जहाज

ईरान का ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’: फारस की खाड़ी में अमेरिकी टैंकर पर मिसाइल स्ट्राइक, धधक उठा जहाज

दुबई/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका से अपना बदला लेने का दावा किया है। गुरुवार, 5 मार्च 2026 को ईरानी सेना (IRGC) ने घोषणा की कि उन्होंने फारस की खाड़ी में एक अमेरिकी तेल टैंकर को निशाना बनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, मिसाइल लगते ही टैंकर आग के गोले में तब्दील हो गया और उससे धुएं का काला गुबार उठता देखा गया।

क्यों किया ईरान ने हमला? (प्रतिशोध की आग)

यह हमला बुधवार को हिंद महासागर में हुई एक बड़ी घटना का जवाब माना जा रहा है। कल (4 मार्च) एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से उड़ा दिया था, जिसमें 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई थी।

* ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका को इस “समुद्री अत्याचार” के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।

* इस हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान ने अमेरिकी टैंकर को निशाना बनाकर अपना ‘बदला’ पूरा करने का दावा किया।

घटना की मुख्य बातें:

* हमले का स्थान: उत्तरी फारस की खाड़ी, कुवैती जलक्षेत्र के करीब।

* हथियार: IRGC के अनुसार, जहाज पर ‘सटीक मार करने वाली मिसाइल’ से हमला किया गया।

* मौजूदा स्थिति: टैंकर पर भीषण आग लगी हुई है। हालांकि, अभी तक अमेरिकी नौसेना या पेंटागन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि या नुकसान का विवरण जारी नहीं किया गया है।

* हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान ने ऐलान किया है कि युद्ध की स्थिति में इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर पूरी तरह उसका नियंत्रण होगा और किसी भी पश्चिमी जहाज को गुजरने नहीं दिया जाएगा।

वैश्विक प्रभाव और तेल की कीमतों में उछाल

इस हमले की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया है:

* कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में 3% से अधिक का उछाल देखा गया है।

* दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है, ऐसे में इस मार्ग के असुरक्षित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।

पृष्ठभूमि: जारी है भीषण युद्ध

पिछले शनिवार (28 फरवरी 2026) से अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) शुरू किया है। इस दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता और कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। जवाब में ईरान ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर हजारों ड्रोन और मिसाइलें दागी हैं।

 

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