‘दुनिया में तेल-गैस की कमी नहीं…’, मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा बयान
‘दुनिया में तेल-गैस की कमी नहीं…’, मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत सरकार का बड़ा बयान
नई दिल्ली, 5 मार्च 2026: मध्य पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक तेल-गैस सप्लाई पर अनिश्चितता मची हुई है, लेकिन भारत सरकार ने लोगों को आश्वस्त किया है कि देश में ऊर्जा सुरक्षा मजबूत है। सरकारी सूत्रों और पेट्रोलियम मंत्रालय के बयान के अनुसार, “दुनिया में तेल-गैस की कमी नहीं है, कई देश देने को तैयार हैं”।
सरकार ने स्पष्ट किया कि:
देश में क्रूड ऑयल, एलपीजी (कुकिंग गैस) और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) का पर्याप्त भंडार मौजूद है।
भारत के पास फिलहाल 25-30 दिन (कुछ स्रोतों में 6-8 सप्ताह) का क्रूड ऑयल और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का स्टॉक है, जो छोटी अवधि के संकट को संभाल सकता है।
दुनिया में कच्चे तेल या गैस की कोई कमी नहीं है। भारत वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं जैसे ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस और अन्य देशों के साथ संपर्क में है, जो अतिरिक्त सप्लाई देने को तैयार हैं।
पिछले वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाई है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट के अलावा अन्य रूट्स से आयात संभव है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार स्थिति पर 24×7 नजर रख रही है और सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि पेट्रोल, डीजल, एलपीजी जैसी जरूरी चीजें उपलब्ध और किफायती दरों पर बनी रहें। मंत्रालय ने एक 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो सप्लाई और स्टॉक की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर युद्ध 10-15 दिनों से ज्यादा चला और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह प्रभावित रहा (जिससे भारत के 40% क्रूड और 85-90% एलपीजी आयात प्रभावित होता है), तो स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कुछ रिफाइनरियों में पहले से ही गैस सप्लाई में कटौती शुरू हो गई है, लेकिन सरकार ने पैनिक न करने की अपील की है।
सरकार का दावा है कि ऊर्जा सुरक्षा “आरामदायक” स्थिति में है और जरूरत पड़ने पर रूस जैसे पुराने दोस्त अतिरिक्त मदद के लिए तैयार हैं। इससे आम आदमी पर तत्काल असर नहीं पड़ने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक कीमतों में उछाल से पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ सकती हैं।
