तेजस्वी यादव नहीं लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव! चर्चाओं के बीच RJD ने बदला मन, ये है वजह
तेजस्वी यादव नहीं लड़ेंगे राज्यसभा चुनाव! चर्चाओं के बीच RJD ने बदला मन, ये है वजह
3 मार्च 2026: बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 की हलचल चरम पर है। 16 मार्च को होने वाले चुनाव में 5 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां NDA के पास मजबूत बहुमत (202 विधायक) है और 4 सीटें आसानी से जीत लेगा। पांचवीं सीट पर महागठबंधन (RJD+कांग्रेस+वाम) की कोशिश है, लेकिन उनके पास सिर्फ 35 विधायक हैं – जीत के लिए कम से कम 41 वोट चाहिए। इसी बीच RJD ने पहले राज्यसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया और तेजस्वी यादव के नाम की जोरदार चर्चा हुई, लेकिन अब साफ हो गया है कि तेजस्वी यादव खुद राज्यसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे!
RJD ने क्यों बदला मन? मुख्य वजहें
नंबर गेम में कमजोर स्थिति: महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं। जीत के लिए AIMIM (5), BSP (1) और अन्य छोटे दलों का पूरा समर्थन चाहिए। तेजस्वी की उम्मीदवारी से एकजुटता तो बढ़ती, लेकिन NDA के दबाव में AIMIM/BSP का समर्थन मिलना मुश्किल। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जीत की 100% गारंटी नहीं होने पर तेजस्वी को मैदान में नहीं उतारा जाएगा।
बिहार में पार्टी की कमान मजबूत रखना: तेजस्वी यादव बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता हैं। अगर वे दिल्ली चले गए तो RJD में नेतृत्व का वैक्यूम पैदा हो सकता है। कई जानकारों का मानना है कि तेजस्वी दिल्ली जाने पर पार्टी बिखर सकती है – जैसे बिहार कांग्रेस जगन्नाथ मिश्रा के दिल्ली जाने पर बिखर गई थी।
पार्टी बैठक में कोई प्रस्ताव नहीं: RJD की संसदीय बोर्ड बैठक (1 मार्च) में लालू प्रसाद और तेजस्वी को उम्मीदवार चुनने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन तेजस्वी खुद के लिए कोई प्रस्ताव पास नहीं हुआ। सूत्रों ने 100% कन्फर्म किया कि वे नहीं लड़ेंगे।
रणनीतिक फैसला: RJD ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया ताकि NDA को चुनौती मिले और विधायकों में एकजुटता बनी रहे। लेकिन तेजस्वी की जगह अनुभवी चेहरों पर दांव लगाया जाएगा।
RJD के संभावित उम्मीदवार कौन?
प्रेमचंद गुप्ता – लालू के सबसे करीबी, कई बार राज्यसभा सांसद रह चुके।
अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह) – भूमिहार समाज से, पटना के पालीगंज से। रिटायर होने वाले मौजूदा सांसदों में से एक।
पार्टी जल्द नामांकन (5 मार्च तक) करेगी। तेजस्वी की जगह इनमें से किसी एक पर लालू का दांव लग सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
चिराग पासवान ने तंज कसा: “तेजस्वी विधानसभा चुनाव की तरह राज्यसभा में भी हारेंगे।”
गिरिराज सिंह ने कहा: “अच्छा है, लड़कर देख लें।”
RJD का फोकस अब बिहार में मजबूत रहना और 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारी पर है। तेजस्वी दिल्ली जाने के बजाय बिहार की राजनीति में ही सक्रिय रहेंगे।
क्या लगता है – तेजस्वी का राज्यसभा न लड़ना सही फैसला है या मौका गंवा दिया? कमेंट में बताएं!
