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जेएनयू में कुलपति की कथित जातिवादी टिप्पणी पर छात्रों का आक्रोश चरम पर, 14 छात्र गिरफ्तार—कैंपस में हंगामा और पुलिस से झड़प!

नई दिल्ली: जेएनयू में कुलपति की कथित जातिवादी टिप्पणी पर छात्रों का आक्रोश चरम पर, 14 छात्र गिरफ्तार—कैंपस में हंगामा और पुलिस से झड़प!

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में फिर से उबाल है। कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित की एक पॉडकास्ट में दी गई टिप्पणी को छात्रों ने जातिवादी करार दिया, जिसके विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। छात्रों ने इस्तीफे की मांग की और यूजीसी की नई इक्विटी गाइडलाइंस लागू करने, रोहित वेमुला एक्ट जैसी मांगों को लेकर ‘लॉन्ग मार्च’ निकाला। लेकिन प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया, जिसमें दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज किया और 14 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया।

घटना की शुरुआत फरवरी मध्य में हुई, जब कुलपति ने ‘द संडे गार्जियन’ को दिए इंटरव्यू/पॉडकास्ट में यूजीसी की इक्विटी रेगुलेशंस पर बात करते हुए कहा कि “हमेशा पीड़ित (विक्टिम) बनकर रहने से प्रगति नहीं होती” और इसे “ब्लैक्स के लिए हुआ, दलितों के लिए वही लाया गया” जैसी टिप्पणी की। छात्र संगठनों, खासकर JNUSU, AISA, SFI ने इसे दलित-बहुजन समुदाय पर हमला बताया और “विक्टिम कार्ड” खेलने का आरोप लगाया। कुलपति ने सफाई दी कि वे खुद बहुजन हैं और बात संदर्भ से बाहर निकाली गई, लेकिन छात्र नहीं माने।

26 फरवरी को JNUSU के नेतृत्व में शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकाला गया। छात्रों का दावा है कि गेट पर पुलिस ने रोक लगाई, लाठीचार्ज किया और कई छात्र घायल हुए। 51 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 14 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया। गिरफ्तारों में JNUSU के तीन पदाधिकारी और पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं। पुलिस ने IPC की धाराओं 212, 121(1), 132, 3(5) आदि लगाई।

पटियाला हाउस कोर्ट ने 27 फरवरी को बेल मंजूर की, लेकिन सख्त शर्तों (पते की जांच आदि) के कारण रिहाई में देरी हुई। 1-2 मार्च को कोर्ट ने तत्काल रिहाई का आदेश दिया, जिसके बाद छात्र जेल से बाहर आए और नारे लगाते हुए कैंपस लौटे।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कुलपति का पुतला फूंका, पुलिस का भी पुतला जलाया और ‘रोहित एक्ट’ लागू करने, जातिवादी भेदभाव रोकने की मांग की। पूर्व JNUSU अध्यक्ष धनंजय ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई। विपक्षी संगठन इसे “छात्र आंदोलन पर दमन” बता रहे हैं, जबकि प्रशासन UGC नियमों और सुरक्षा का हवाला दे रहा है।

JNU में यह विवाद UGC की नई गाइडलाइंस, कुलपति की नियुक्ति और कैंपस में जातिगत मुद्दों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा है। छात्र अब भी धरने पर हैं और इस्तीफे की मांग जारी है। दिल्ली पुलिस ने कैंपस के बाहर भारी सुरक्षा बढ़ा दी है, और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

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