बिहार में राज्यसभा चुनाव की हलचल तेज: तेजस्वी यादव से मिले AIMIM प्रदेश अध्यक्ष, गठबंधन या समर्थन का खेल?
बिहार में राज्यसभा चुनाव की हलचल तेज: तेजस्वी यादव से मिले AIMIM प्रदेश अध्यक्ष, गठबंधन या समर्थन का खेल?
बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव (मार्च 2026 में 2 सीटें खाली होने वाली हैं) को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। महागठबंधन (RJD-Congress-Left) और NDA (BJP-JDU-LJP-R) के बीच जोर-आजमाइश के बीच एक नया ट्विस्ट आया है – AIMIM (अल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने आज तेजस्वी यादव से मुलाकात की।
मुलाकात के मुख्य बिंदु:
अख्तरुल इमान पटना स्थित तेजस्वी यादव के आवास पर पहुंचे और करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में चर्चा की।
AIMIM ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार बातचीत राज्यसभा चुनाव में समर्थन और महागठबंधन के साथ संभावित तालमेल पर केंद्रित रही।
AIMIM बिहार में सीमांचल (किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया) और कुछ मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत पकड़ रखता है। 2020 विधानसभा में पार्टी ने 5 सीटों पर जीत हासिल की थी।
तेजस्वी यादव ने मुलाकात के बाद मीडिया से कहा: “हम सभी विपक्षी दलों से बातचीत कर रहे हैं। बिहार की जनता के हित में कोई भी फैसला लिया जाएगा।”
राज्यसभा चुनाव का बैकग्राउंड:
बिहार से कुल 16 राज्यसभा सीटें हैं।
मार्च 2026 में 2 सीटें खाली हो रही हैं – एक RJD की (अब तक अनुमानित) और एक JDU की।
RJD-Mahagathbandhan के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या है, लेकिन JDU-BJP गठबंधन भी मजबूत है।
अगर AIMIM RJD को समर्थन देता है तो महागठबंधन की स्थिति और मजबूत हो सकती है, खासकर अगर क्रॉस-वोटिंग या निर्दलीयों का खेल चले।
NDA की तरफ से अभी तक कोई नया कदम नहीं, लेकिन JDU के नेतृत्व में NDA अपनी एक सीट बचाने के लिए जोर लगा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषण:
AIMIM और RJD के बीच पहले से ही सीमांचल में वोट बंटवारे का इतिहास रहा है, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव के बाद दोनों के बीच कुछ तनाव भी दिखा।
तेजस्वी की यह मुलाकात AIMIM को महागठबंधन में लाने या कम से कम BJP-JDU को नुकसान पहुंचाने की कोशिश मानी जा रही है।
AIMIM अक्सर “थर्ड फ्रंट” की बात करता रहा है, लेकिन राज्यसभा चुनाव में सीटें कम होने से समर्थन का खेल जरूरी हो जाता है।
अगर AIMIM RJD को समर्थन देता है तो यह बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर साबित हो सकता है।
फिलहाल दोनों पक्षों ने मुलाकात को “सौहार्दपूर्ण” बताया है, लेकिन पटना की सियासी गलियों में अब “AIMIM का क्या रुख?” का सवाल गूंज रहा है। क्या यह महागठबंधन की रणनीति का हिस्सा है या AIMIM अपनी अलग राह चुन रहा है? अगले कुछ दिनों में साफ हो जाएगा।
