राजनीति

राजस्थान का ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ क्या है? जानिए पूरा प्रावधान, उद्देश्य और क्यों हो रहा है इतना विवाद

राजस्थान सरकार ने ‘दि राजस्थान प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेज इन डिस्टर्ब्ड एरियाज बिल, 2026’ (संक्षेप में डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026) को विधानसभा में पेश किया है। यह बिल गुजरात के समान कानून पर आधारित है और राज्य में सांप्रदायिक तनाव, जनसंख्या असंतुलन (demographic imbalance) और जबरन संपत्ति बिक्री (distress sales) को रोकने का दावा करता है।

बिल का मुख्य उद्देश्य

राज्य के किसी भी क्षेत्र को ‘अशांत’ या ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित करने की शक्ति सरकार को मिलेगी।

ऐसा तब होगा जब:

दंगे, हिंसा, भीड़ द्वारा अशांति या साम्प्रदायिक तनाव हो।

किसी एक समुदाय की ‘अनुचित जमावड़े’ (improper clustering) हो – यानी मजबूरी, डर या दबाव से एक समुदाय का किसी इलाके में ज्यादा संख्या में बसना, जिससे मिश्रित आबादी की पहचान कमजोर हो या तनाव बढ़े।

जनसंख्या में जानबूझकर बदलाव की कोशिश हो, जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़े।

एक बार घोषित होने पर उस इलाके में अचल संपत्ति (जमीन, मकान, दुकान) की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण या रजिस्ट्री बिना जिला कलेक्टर या एडीएम की लिखित अनुमति के अमान्य होगी।

किरायेदारों को जबरन बेदखली से सुरक्षा मिलेगी।

सजा और प्रावधान

उल्लंघन पर 3 से 5 साल की जेल और न्यूनतम ₹1 लाख जुर्माना (या संपत्ति मूल्य का 10%)।

अपराध कॉग्निजेबल और नॉन-बेलेबल (गैर-जमानती) होगा।

अनुमति के लिए एफिडेविट जरूरी होगा कि बिक्री स्वैच्छिक है और बाजार मूल्य पर है।

घोषणा की अवधि शुरू में 3 साल तक, बढ़ाई जा सकती है।

सरकार का दावा

भजनलाल शर्मा सरकार का कहना है कि यह बिल सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक विविधता और मिश्रित आबादी को बचाने के लिए है।

गरीबों/कमजोरों की संपत्ति जबरन सस्ते में खरीदने या डर से पलायन रोकने का इरादा।

गुजरात में 1991 से ऐसा कानून है, राजस्थान दूसरा राज्य बनेगा।

विवाद और विरोध

कांग्रेस और मुस्लिम संगठनों ने इसे असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और राजनीतिक बताया – अनुच्छेद 14, 15, 19 का उल्लंघन।

आलोचक कहते हैं कि यह डेमोग्राफिक पुलिसिंग को बढ़ावा देगा, गेट्टो बनाएगा और संपत्ति अधिकारों पर राज्य का अत्यधिक नियंत्रण बढ़ाएगा।

गुजरात में इसी कानून पर हाईकोर्ट में चुनौतियां हैं और कुछ संशोधन स्टे पर हैं।

विपक्ष का आरोप: मौजूदा कानून (IPC, CrPC) से ही तनाव नियंत्रित हो सकता है, यह बिल डर फैलाएगा।

यह बिल बजट सत्र में पेश किया गया और बहस के बाद पारित होने की संभावना है। अगर लागू हुआ तो राजस्थान में संवेदनशील इलाकों (जैसे जयपुर, अजमेर, टोंक, जोधपुर आदि) में प्रॉपर्टी डील्स पर बड़ा असर पड़ेगा।

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