Saturday, March 7, 2026
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उत्तराखंड

मसूरी की मालरोड अब बदलेगी तस्वीर: पारंपरिक साइकिल रिक्शा हटेंगे, जगह लेंगे गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा

मसूरी की मालरोड अब बदलेगी तस्वीर: पारंपरिक साइकिल रिक्शा हटेंगे, जगह लेंगे गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा

मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी की सबसे प्रसिद्ध और व्यस्त सैरगाह मालरोड अब एक बड़े बदलाव की कगार पर है। मसूरी नगर पालिका परिषद ने पारंपरिक साइकिल रिक्शा को हटाकर उनकी जगह गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा चलाने का फैसला लिया है। यह कदम शहर के सौंदर्यीकरण, पर्यटकों की सुविधा और मालरोड पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मसूरी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी गौरव भसीन ने बताया कि शुरुआती चरण में करीब 40 गोल्फ कार्ट संचालित की जाएंगी। प्रत्येक गोल्फ कार्ट में दो लोगों को समायोजित किया जाएगा, जिससे अधिकतम स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिल सके। पहले से चल रही गोल्फ कार्ट में भी अतिरिक्त व्यक्ति जोड़े जाएंगे।

प्रभावित होंगे 121 रिक्शा श्रमिक

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस बदलाव से कुल 121 साइकिल रिक्शा चालक प्रभावित होंगे। विस्थापन को संतुलित करने के लिए चरणबद्ध तरीके से गोल्फ कार्ट मंगाई जाएंगी। जो श्रमिक रिक्शा संचालन जारी नहीं रखना चाहते, उन्हें लगभग 2.25 लाख रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए सूची तैयार की जा रही है और श्रमिकों को 15 दिनों के भीतर प्रस्ताव देने को कहा गया है।

विशेष प्रावधान

13 विधवा महिलाएं (जो रिक्शा चालकों के परिवार से हैं) को वेडिंग जोन में समायोजित करने की योजना है, ताकि उनका रोजगार प्रभावित न हो।

यदि श्रमिकों से सहमति बनती है, तो ये गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा सिर्फ मालरोड तक सीमित नहीं रहेंगे—ये मसूरी के अन्य प्रमुख स्थलों (जैसे लाइब्रेरी बाजार, कैम्पटी फॉल, मॉल रोड के विस्तारित हिस्से) पर भी चलाए जा सकते हैं।

क्यों लिया गया ये फैसला?

मालरोड पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ने से ट्रैफिक और भीड़ का दबाव बहुत ज्यादा हो गया था।

साइकिल रिक्शा से होने वाला शोर, धूल और पारंपरिक तरीके से चलने की धीमी गति अब आधुनिक पर्यटन के अनुरूप नहीं रह गई।

गोल्फ कार्ट और ई-रिक्शा पर्यावरण अनुकूल, शांत और तेज होंगे, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा।

शहर की पारंपरिक तस्वीर को आधुनिक रूप देने की कोशिश।

दो तरफा राय

एक तरफ पर्यटक और पर्यटन विभाग इसे स्वागतयोग्य मान रहे हैं—क्योंकि ये सुविधा बढ़ाएगा और शहर को क्लीन-ग्रीन इमेज देगा। दूसरी तरफ, वर्षों से साइकिल रिक्शा चलाकर परिवार चलाने वाले श्रमिकों के लिए ये बदलाव भावनात्मक और आर्थिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका है। कई परिवारों की आजीविका सीधे प्रभावित होगी।

मालरोड मसूरी की पहचान है—जहां पर्यटक घूमते हैं, फोटो खींचते हैं, शॉपिंग करते हैं। अब यहां साइकिल रिक्शा की जगह गोल्फ कार्ट की आवाज गूंजेगी। क्या ये बदलाव मसूरी को और आकर्षक बनाएगा या पारंपरिक सैर की यादों को मिटा देगा? आप क्या सोचते हैं—साइकिल रिक्शा हटना सही फैसला है या नहीं? कमेंट में बताएं!

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