उत्तराखंड

न्यायालयों में बम धमकी के बाद DGP दीपम सेठ के सख्त निर्देश: सुरक्षा को ‘अभेद्य’ बनाने के लिए 10 बड़े कदम

न्यायालयों में बम धमकी के बाद DGP दीपम सेठ के सख्त निर्देश: सुरक्षा को ‘अभेद्य’ बनाने के लिए 10 बड़े कदम

उत्तराखंड में कई न्यायालय परिसरों को मिल रही बम से उड़ाने की धमकियों के बाद डीजीपी दीपम सेठ ने पूरे प्रदेश में न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने के लिए नए और सख्त निर्देश जारी किए हैं। पुलिस मुख्यालय ने पहले ही सभी जनपदों में न्यायाधीशों, न्यायालयों और परिसरों का सुरक्षा ऑडिट कराने के आदेश दिए थे। अब इसी क्रम में अतिरिक्त निर्देश जारी कर सुरक्षा को ‘अभेद्य’ बनाने पर जोर दिया गया है।

डीजीपी दीपम सेठ ने कहा, “प्रदेश के न्यायालयों में मिल रही धमकियों को देखते हुए हमने सुरक्षा को और सुदृढ़ करने के लिए ये अतिरिक्त निर्देश जारी किए हैं। न्याय व्यवस्था की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

डीजीपी दीपम सेठ के प्रमुख निर्देश (पूर्ण सूची):

पर्याप्त पुलिस और पीएसी बल की तैनाती

सभी जनपदों के न्यायालय परिसरों में पर्याप्त संख्या में पुलिस और पीएसी बल को आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ तैनात किया जाए।

प्रवेश-निकासी पर सख्त पहचान पत्र व्यवस्था

न्यायालयों के सभी प्रवेश और निकासी द्वारों पर संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर पहचान पत्र (आईडी) के माध्यम से ही प्रवेश-निकासी की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि कोई अनाधिकृत व्यक्ति परिसर में घुस न सके।

बैरियर और एक्सेस कंट्रोल + स्क्रीनिंग

परिसर में बैरियर लगाकर एक्सेस कंट्रोल सिस्टम बनाया जाए। प्रवेश द्वारों पर आने वाले हर व्यक्ति की सख्त स्क्रीनिंग हो, जिसके लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई (Intelligence Unit) और अन्य पुलिस बल तैनात किए जाएं।

सुरक्षा कर्मियों को सतर्क किया जाए

न्यायाधीशों और न्यायालयों की सुरक्षा ड्यूटी में पहले से तैनात कर्मचारियों को वर्तमान सुरक्षा संवेदनशीलता के प्रति पूरी तरह सतर्क कर दिया जाए।

Quick Response Team (QRT) और ATS की तैनाती

आतंकवादी घटनाओं और बम हमलों के मद्देनजर प्रत्येक जनपद में Quick Response Team और ATS (Anti-Terrorist Squad) की टीमों को न्यायालय परिसरों में नियुक्त किया जाए।

सुबह बम डिस्पोजल और डॉग स्क्वाड से चेकिंग

न्यायालय की कार्रवाई शुरू होने से पहले हर सुबह बम डिस्पोजल दस्ते (BDDS) और डॉग स्क्वाड से पूरे परिसर की सघन जांच (एएस चेक) कराई जाए।

सीसीटीवी मॉनिटरिंग को और प्रभावी बनाना

परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की लगातार मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

नियमित पेट्रोलिंग

न्यायालय परिसरों में पुलिस की नियमित और सघन पेट्रोलिंग की व्यवस्था की जाए।

ड्यूटी कर्मियों की नियमित चेकिंग

ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों की नियमित रूप से चेकिंग की जाए ताकि कोई लापरवाही न हो।

मॉक ड्रिल और आपातकालीन निकास योजना

समय-समय पर न्यायालय परिसरों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएं और आपातकालीन निकास योजना तैयार रखी जाए।

पृष्ठभूमि

पिछले कुछ दिनों में कई जिलों के न्यायालयों को ईमेल और फोन के जरिए बम धमकी मिली थी, जिसके बाद हाईकोर्ट और जिला न्यायालयों में हाई अलर्ट जारी किया गया। कई जगहों पर बम स्वीपिंग ऑपरेशन चले और परिसर खाली कराए गए। इन घटनाओं के बाद सरकार और पुलिस ने सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस अपनाया है।

ये निर्देश तुरंत प्रभाव से लागू करने के आदेश दिए गए हैं। क्या ये कदम न्यायालयों में सुरक्षा की भावना बहाल करेंगे? या धमकियां राजनीतिक/सोशल मीडिया से जुड़ी हैं? आपकी राय क्या है? कमेंट में बताएं!

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