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केरल स्टोरी 2 ट्रेलर विवाद: केरल सरकार ने फिल्म को ‘प्रोपेगैंडा’ बताया, हाई कोर्ट में रोक की मांग

विपुल अमृतलाल शाह प्रोडक्शन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ के ट्रेलर रिलीज होते ही देशभर में भारी बवाल मच गया! 17 फरवरी 2026 को ट्रेलर लॉन्च होने के बाद से ही केरल में राजनीतिक पार्टियां एकजुट होकर विरोध कर रही हैं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इसे “झूठी प्रोपेगैंडा”, “जहर फैलाने वाली फिल्म” और राज्य की सेक्युलर परंपरा पर हमला बताया है। उन्होंने जनता से फिल्म को रिजेक्ट करने की अपील की है।

विवाद के मुख्य कारण

ट्रेलर में विवादित सीन: ट्रेलर में एक हिंदू महिला को जबरदस्ती बीफ खिलाने का दृश्य दिखाया गया है, जिसे मुस्लिम परिवार द्वारा फोर्स कन्वर्जन का हिस्सा बताया गया। सोशल मीडिया पर इसे “अनरियलिस्टिक” और “केरल की इमेज खराब करने वाला” कहा जा रहा है। कई यूजर्स ने लिखा कि केरल में बीफ सभी कम्युनिटी में आम है, लेकिन फिल्म इसे “ट्रैपिंग” से जोड़ रही है।

लव जिहाद नैरेटिव: फिल्म फिर से लव जिहाद और फोर्स्ड कन्वर्जन पर फोकस करती है, जहां हिंदू लड़कियों को मुस्लिम युवकों द्वारा लुभाकर कन्वर्ट करने का आरोप लगाया गया। ट्रेलर में दावा है कि “ट्रैपिंग हिंदू गर्ल्स के लिए पैसे मिलते हैं”।

राजनीतिक हमला: LDF (सीपीआईएम) और UDF (कांग्रेस) दोनों ने फिल्म को “संग परिवर की हिंदू मेजोरिटेरियन एजेंडा” का हिस्सा बताया। वे कहते हैं कि यह मुस्लिमों को “लव जिहादिस्ट” दिखाकर सांप्रदायिक तनाव भड़काती है। केरल के मंत्री साजी चेरियन ने इसे “संग परिवर फैक्ट्री का प्रोडक्ट” कहा।

बीजेपी का जवाब: केरल बीजेपी अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सीएम पर पलटवार किया कि वे हाइपोक्रिसी कर रहे हैं और राज्य की असफलताओं से ध्यान हटा रहे हैं। फिल्ममेकर्स का कहना है कि यह “ट्रू इवेंट्स पर आधारित” है और समाज का कड़वा सच दिखाती है।

कानूनी कदम

केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, जिसमें फिल्म की रिलीज (27 फरवरी 2026) पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि यह मलयाली समाज की इमेज खराब करती है और फेक नैरेटिव फैलाती है। CBFC ने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया है, जिस पर प्रोड्यूसर विपुल शाह ने धन्यवाद दिया।

डायरेक्टर और मेकर्स का पक्ष

डायरेक्टर कमाख्या नारायण सिंह ने सीएम पर तंज कसा कि “वे आंखें बंद कर चुके हैं”। मेकर्स का दावा है कि फिल्म युवा लड़कियों और परिवारों को जागरूक करने के लिए है।

ट्रेलर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जहां एक तरफ सपोर्ट (हिंदुत्व ग्रुप्स से) और दूसरी तरफ ट्रोलिंग (केरल से) जारी है। फिल्म रिलीज से पहले ही राजनीतिक और सोशल बहस का केंद्र बन गई है—केरल की सेक्युलर इमेज vs. कन्वर्जन का मुद्दा।

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