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दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को मार्शल लॉ लगाने के मामले में उम्रकैद की सजा

दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल को मार्शल लॉ लगाने के मामले में उम्रकैद की सजा

सियोल: दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने गुरुवार को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल (65) को 2024 में मार्शल लॉ (सैन्य शासन) लागू करने और विद्रोह (इंसरेक्शन) की साजिश रचने का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने दिया, जहां जज जी कुई-यून ने कहा कि यून ने सेना और पुलिस को गलत तरीके से जुटाकर संसद पर कब्जा करने, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करने और निरंकुश शासन स्थापित करने की कोशिश की।

मुख्य घटनाक्रम

3 दिसंबर 2024 की रात यून ने अचानक टीवी पर मार्शल लॉ घोषित किया, जिसमें राजनीतिक गतिविधियां प्रतिबंधित कर दी गईं और मीडिया पर सेंसरशिप लगा दी गई। उन्होंने दावा किया कि विपक्षी ताकतें उत्तर कोरिया से मिली हुई हैं और लोकतंत्र को खतरा है।

यह घोषणा मात्र कुछ घंटों में संसद द्वारा रद्द कर दी गई, जिसके बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

यून को इम्पीच किया गया, अप्रैल 2025 में संवैधानिक कोर्ट ने इम्पीचमेंट को बरकरार रखा और उन्हें पद से हटा दिया गया।

जनवरी 2025 में उन्हें गिरफ्तार किया गया (दक्षिण कोरिया के इतिहास में पहली बार कोई राष्ट्रपति पद पर रहते गिरफ्तार हुआ)।

अभियोजन पक्ष ने मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने उम्रकैद (लाइफ इम्प्रिजनमेंट विद लेबर) सुनाई, क्योंकि योजना पूरी तरह सफल नहीं हुई, कोई मौत नहीं हुई और यून ने शारीरिक बल का सीमित इस्तेमाल किया।

अन्य दोषी

पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग-ह्यून को 30 साल की सजा।

पूर्व प्रधानमंत्री हन डक-सू को पहले ही 23 साल की सजा हो चुकी है।

यून पहले से ही अन्य मामलों (अधिकार का दुरुपयोग, गिरफ्तारी रोकना) में 5 साल की सजा काट रहे हैं।

यह फैसला दक्षिण कोरिया के लोकतंत्र के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है, जहां 1980 के दशक के बाद पहली बार मार्शल लॉ जैसी स्थिति बनी थी। यून अपील कर सकते हैं, लेकिन अगर अपील खारिज हुई तो वे बाकी जिंदगी जेल में बिताएंगे।

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