सोहा अली खान ने शेयर की बचपन की खूबसूरत याद, बताया कैसे भाई सैफ और बहन सबा के साथ मिलकर ‘इलियट’ को बनाते थे कहानियों का हीरो
सोहा अली खान ने शेयर की बचपन की खूबसूरत याद, बताया कैसे भाई सैफ और बहन सबा के साथ मिलकर ‘इलियट’ को बनाते थे कहानियों का हीरो
मुंबई: बचपन की यादें हर किसी के जीवन में एक बेहद खास और अनमोल स्थान रखती हैं। अक्सर एक साधारण सा खिलौना भी बच्चों की कल्पनाओं की दुनिया का सबसे बड़ा हिस्सा बन जाता है। बॉलीवुड अभिनेत्री सोहा अली खान के पास भी ऐसा ही एक खास खिलौना है, जिससे उनके बचपन की खूबसूरत यादें जुड़ी हुई हैं। हाल ही में सोहा ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक वीडियो पोस्ट कर अपने फैंस को उस खास खिलौने से मिलवाया और पटौदी भाई-बहनों के बचपन के कुछ अनसुने किस्से साझा किए।
35 साल पुराना टॉय डॉग ‘इलियट’ बना पीढ़ी का साथी
सोहा ने वीडियो में एक छोटा सा टॉय डॉग (खिलौना कुत्ता) दिखाया, जिसका नाम उन्होंने बचपन में ‘इलियट’ रखा था। खास बात यह है कि बचपन में सोहा का हमसफर रहा यह खिलौना अब उनकी बेटी इनाया नौमी खेमू के पास है। सोहा ने बताया कि वे चाहती थीं कि उनकी बेटी भी अपनी कल्पना की दुनिया को उसी तरह जिए, इसलिए उन्होंने अपना यह सबसे पसंदीदा खिलौना इनाया को सौंप दिया।
भाई सैफ और बहन सबा के साथ रची जाती थीं कहानियां
सोहा अली खान ने अपनी गर्मियों की छुट्टियों को याद करते हुए बताया कि उनके लिए सबसे खूबसूरत पल वो थे, जब वे अपने भाई सैफ अली खान और बहन सबा अली खान पटौदी के साथ मिलकर इस खिलौने के इर्द-गिर्द कहानियां बुना करते थे।
सोहा ने वीडियो में पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा:
”हम तीनों मिलकर इलियट को लेकर अलग-अलग कहानियां बनाया करते थे। एक व्यक्ति कहानी शुरू करता था, दूसरा उसे आगे बढ़ाता था और तीसरा उसमें कोई नया मोड़ जोड़ देता था। हमारी कल्पनाओं में इलियट कभी दुनिया की सैर पर निकल जाता था, तो कभी किसी बड़े रहस्य को सुलझाता था।”
सैफ छिपाते थे सुराग और सबा बनाती थीं खजाने का नक्शा
पटौदी भाई-बहनों के बचपन के खेल किसी फिल्मी एडवेंचर से कम नहीं थे। सोहा ने बताया कि भाई सैफ अली खान खेल को और अधिक रोमांचक बनाने के लिए घर के कोने-कोने में सीक्रेट सुराग (Clues) छिपा दिया करते थे। वहीं, बहन सबा पटौदी उस कल्पित खजाने तक पहुंचने के लिए बकायदा एक नक्शा (Map) तैयार करती थीं। इसके बाद सोहा अपने प्यारे इलियट को साथ लेकर उन सुरागों की तलाश में पूरे घर में निकल पड़ती थीं। इस खेल में उनका पूरा दिन कब बीत जाता था, उन्हें पता भी नहीं चलता था।
खिलौने से ज्यादा महत्वपूर्ण है बच्चों की कल्पनाशीलता
सोहा ने इस बात पर जोर दिया कि असली महत्व उस भौतिक खिलौने का नहीं था, बल्कि उस रचनात्मक सोच और कल्पना का था जो उस खिलौने के जरिए पैदा होती थी। एक साधारण सी चीज भी बच्चों को अपनी सोच को उड़ान देने और नए किरदार गढ़ने का मौका देती है।
अपनी बेटी इनाया के बारे में बात करते हुए सोहा ने कहा कि अब इनाया भी इलियट और अपने अन्य खिलौनों के साथ घंटों खेलती है। वह कभी उन्हें कहानियां सुनाती है, तो कभी उनके लिए नकली खाना बनाती है और कभी टीचर बनकर उन्हें पढ़ाने का नाटक करती है। अपनी बेटी को इस तरह रचनात्मक रूप से विकसित होते देखना उन्हें असीम खुशी देता है।
सोहा ने अपने वीडियो के कैप्शन में एक बेहद प्यारी बात लिखी, “कोई भी खिलौना सिर्फ खेलने की चीज नहीं होता, बल्कि वह एडवेंचर, क्रिएटिविटी और खूबसूरत यादों की शुरुआत होता है।”
