ओमान वार्ता के बाद अमेरिका के नए प्रतिबंध, ईरान ने जताई भरोसे की कमी
ओमान में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम पर अप्रत्यक्ष वार्ता (indirect talks) 6 फरवरी 2026 को मस्कट में हुई थी। ये वार्ता ओमान की मध्यस्थता में हुई, जिसमें ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ सहित जेरेड कुशनर जैसे लोग शामिल थे।
यह वार्ता जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच पहली प्रमुख बैठक थी, जहां तनाव बहुत ज्यादा था और युद्ध की आशंका भी जताई जा रही थी। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख रखे:
ईरान ने कहा कि बातचीत सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रही और उसने यूरेनियम संवर्धन पर कुछ लचीलापन दिखाने की बात कही, बदले में प्रतिबंध हटाने की मांग की।
अमेरिका ने व्यापक एजेंडा चाहा, जिसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (जैसे हूती, हिजबुल्लाह) और मानवाधिकार मुद्दे शामिल हों।
वार्ता खत्म होने के कुछ घंटों बाद ही अमेरिका ने नए प्रतिबंध लगा दिए। इनमें ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल व्यापार से जुड़े 14 जहाजों (shadow fleet), 15 संस्थाओं/कंपनियों और 2 व्यक्तियों को टारगेट किया गया। इनमें एक भारतीय कंपनी भी शामिल बताई गई है। अमेरिका का कहना है कि ये कदम ईरान की “अवैध” तेल बिक्री को रोकने और उसके “मैलिग्न एक्टिविटीज” के लिए राजस्व कम करने के लिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने इसे “maximum pressure campaign” का हिस्सा बताया।
ईरान की प्रतिक्रिया में विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने वार्ता को “good start” और “positive atmosphere” बताया, कहा कि आगे बातचीत जारी रहेगी (modalities और timing बाद में तय होंगे)। लेकिन उन्होंने अमेरिका पर भरोसे की कमी (lack of trust) जताई और कहा कि धमकियां और दबाव बंद होने चाहिए, तभी सार्थक वार्ता संभव है। ईरान ने इन नए प्रतिबंधों को वार्ता के माहौल को खराब करने वाला बताया, जो भरोसे की कमी को और बढ़ाता है।
कुल मिलाकर, वार्ता एक शुरुआत तो हुई लेकिन कोई बड़ा समझौता नहीं हुआ। दोनों पक्ष राजधानियों में विचार-विमर्श के बाद आगे का रास्ता तय करेंगे। स्थिति अभी नाजुक बनी हुई है, जहां एक तरफ डिप्लोमेसी की उम्मीद है तो दूसरी तरफ प्रतिबंध और सैन्य तनाव का खतरा।
