‘योजनाओं के नाम बड़े-बड़े, दर्शन छोटे ना हों तो बेहतर होगा’: बजट पर मायावती का तंज, कहा- जमीनी असर छोटा, गरीब-बहुजन हितैषी नहीं
‘योजनाओं के नाम बड़े-बड़े, दर्शन छोटे ना हों तो बेहतर होगा’: बजट पर मायावती का तंज, कहा- जमीनी असर छोटा, गरीब-बहुजन हितैषी नहीं
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने संघ बजट 2026-27 पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे नामों के भारी-भरकम लेकिन दर्शन में छोटा करार दिया। उन्होंने कहा, “योजनाओं के नाम बड़े-बड़े हैं, लेकिन दर्शन छोटे ना हों तो बेहतर होगा।” मायावती ने बजट को “गरीबों, बहुजन समाज और आम आदमी के हितों के प्रति उदासीन” बताया, जिसमें बड़े-बड़े नाम और परियोजनाओं के वादे तो हैं, लेकिन जमीनी असर छोटा है।
लखनऊ में मीडिया से बातचीत और सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में बसपा सुप्रीमो ने कहा कि बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं और वादों के नाम भले ही आकर्षक हों, लेकिन इनका क्रियान्वयन और वास्तविक लाभ आम जनता तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट “गरीब-बहुजन हितैषी नहीं” है और राजनीतिक हितों को ज्यादा महत्व दिया गया है। मायावती ने कहा, “बजट में योजनाओं के नाम तो बड़े हैं, लेकिन इनका दर्शन और असर छोटा है। लोगों के जीवन में बदलाव लाने के बजाय सिर्फ घोषणाएं हैं।”
मायावती ने बजट को “केंद्रीय सरकार की पुरानी आदत” बताया, जहां बड़े-बड़े ऐलान होते हैं लेकिन क्रियान्वयन में कमी रहती है। उन्होंने कहा कि बजट का असली मूल्यांकन लोगों के जीवन में आए बदलाव से होना चाहिए, न कि वाहवाही से। बसपा प्रमुख ने केंद्र पर बहुजन समाज को नजरअंदाज करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विकास के फायदे सिर्फ चुनिंदा लोगों तक पहुंच रहे हैं।
यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब बजट में इंफ्रा, महिला सशक्तिकरण, एमएसएमई और हाई-स्पीड रेल जैसे बड़े ऐलान हुए हैं, लेकिन विपक्षी नेता इसे अपर्याप्त और दिखावटी बता रहे हैं। मायावती की टिप्पणी बजट पर UP की प्रमुख विपक्षी आवाजों में से एक है, जहां अखिलेश यादव ने भी इसी तरह की आलोचना की है। केंद्र की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं आया है।
