Saturday, March 7, 2026
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जया एकादशी 2026: कब है, पूजा विधि, व्रत कथा, आरती और नियम – पूरी जानकारी

जया एकादशी 2026: कब है, पूजा विधि, व्रत कथा, आरती और नियम – पूरी जानकारी

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जया एकादशी (जिसे भैमी या भीष्म एकादशी भी कहते हैं) माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। यह व्रत पापों से मुक्ति, पिशाच योनि से छुटकारा और मोक्ष प्राप्ति के लिए किया जाता है। इस साल जया एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

जया एकादशी 2026 कब है? (तारीख और समय)

एकादशी तिथि शुरू: 28 जनवरी 2026 (बुधवार) दोपहर 4:35 बजे से।

एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार) दोपहर 1:55 बजे तक।

व्रत रखने की मुख्य तिथि: 29 जनवरी 2026 (गुरुवार) – क्योंकि उदय तिथि (सुबह में तिथि) इसी दिन है।

पारण का समय: 30 जनवरी 2026 (शुक्रवार) सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक (द्वादशी समाप्ति तक)। पारण सुबह सूर्योदय के बाद करना चाहिए, लेकिन द्वादशी तिथि में।

नोट: समय लोकेशन (दिल्ली/उत्तराखंड) के अनुसार थोड़ा बदल सकता है। स्थानीय पंचांग से कन्फर्म करें।

जया एकादशी व्रत की महत्वपूर्ण कथा (Jaya Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से पूछा कि माघ शुक्ल एकादशी का व्रत कैसे करें। भगवान कृष्ण ने बताया:

एक बार हैमंत ऋतु में राजा मंदाता के राज्य में सूखा पड़ गया। राजा ने ऋषियों से पूछा तो पता चला कि उनके पूर्वजों ने पाप किया था। राजा ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए व्रत करने का फैसला किया।

भगवान विष्णु ने स्वप्न में कहा कि जया एकादशी का व्रत करो। राजा ने विधि-विधान से व्रत किया। इससे उनके पूर्वजों को पिशाच योनि से मुक्ति मिली और राज्य में वर्षा हुई। व्रत करने से पाप नष्ट होते हैं, पिशाच योनि नहीं मिलती, और मोक्ष प्राप्ति होती है।

जया एकादशी पूजा विधि (Puja Vidhi Step-by-Step)

सुबह उठकर: ब्रह्म मुहूर्त में उठें, स्नान करें। साफ वस्त्र पहनें।

संकल्प: विष्णु जी का ध्यान करें। व्रत का संकल्प लें – “मैं जया एकादशी व्रत विधिपूर्वक करूंगा।”

पूजा स्थल तैयार: मंदिर या चौकी पर भगवान विष्णु-लक्ष्मी की मूर्ति/चित्र रखें। कलश स्थापित करें।

पूजा सामग्री: फूल, तुलसी दल, पीला चंदन, अक्षत, फल, मिठाई, घी का दीपक, अगरबत्ती, धूप, कमल गट्टा।

पूजा:

विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा पढ़ें।

तुलसी दल और तिल अर्पित करें (विशेष महत्व)।

भगवान को पीले फूल, पीला वस्त्र चढ़ाएं।

आरती करें।

कथा सुनें: व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।

रात में: भजन-कीर्तन करें। जागरण करें (संभव हो तो)।

पारण: अगले दिन (30 जनवरी) पारण समय में फलाहार या सात्विक भोजन से व्रत खोलें।

जया एकादशी व्रत के नियम और क्या खाएं-न खाएं

व्रत नियम:

फलाहार: फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, आलू, चावल का आटा (बिना नमक/अनाज के पराठे)।

अनाज, नमक, तेल, मसाले, चावल (कुछ परंपराओं में), लहसुन-प्याज, तामसिक भोजन वर्जित।

ब्रह्मचर्य पालन, झूठ-निंदा से दूर रहें।

दान-पुण्य करें (तिल, कंबल, जूते आदि)।

रात में सोएं नहीं (जागरण)।

न करें: क्रोध, झूठ, हिंसा, गपशप।

जया एकादशी आरती (Vishnu Ji Ki Aarti)

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, कासन में दूर करे।

ॐ जय जगदीश हरे…

रत्न सिंहासन राजे, राजे रत्न सिंहासन राजे।

चंदन चंदन की सुगंध, सुगंध चंदन की सुगंध, घंटा घड़ियाल बाजे।

ॐ जय जगदीश हरे…

(पूर्ण आरती: श्री विष्णु आरती या एकादशी माता आरती पढ़ें।)

जया एकादशी व्रत से सभी कष्ट दूर होते हैं, पाप नष्ट होते हैं और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। यदि आप व्रत रख रहे हैं, तो शुभकामनाएं! स्थानीय पंडित या पंचांग से समय कन्फर्म करें।

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