Saturday, March 7, 2026
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बसंत पंचमी 2026: मां सरस्वती की आरती, जिसे किए बगैर नहीं मिलता बसंत पंचमी की पूजा का पूरा फल

बसंत पंचमी 2026: मां सरस्वती की आरती, जिसे किए बगैर नहीं मिलता बसंत पंचमी की पूजा का पूरा फल

बसंत पंचमी 2026 23 जनवरी (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि है, जब ज्ञान, विद्या, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। इस दिन पूजा-अर्चना, किताबों की पूजा और पीले रंग के भोग से मां प्रसन्न होती हैं। लेकिन पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक मां सरस्वती की आरती नहीं उतारी जाती। आरती गाने से मां की कृपा प्राप्त होती है, अज्ञान का नाश होता है और जीवन में ज्ञान-बुद्धि का प्रकाश फैलता है।

मां सरस्वती की प्रसिद्ध आरती (ॐ जय सरस्वती माता)

यह सबसे लोकप्रिय और प्रभावशाली आरती है, जिसे बसंत पंचमी पर हर घर और स्कूल-कॉलेज में गाया जाता है:

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।

सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्यात॥

जय सरस्वती माता॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।

सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

जय सरस्वती माता॥

बायें कर में वीणा, दाएँ कर माला।

शीश मुकुट मणि सोहे, गल शुभ हार॥

जय सरस्वती माता॥

रत्न जड़ित पद्मासन, धवल चमर व्यजन।

शुभ हंसिनी श्वेत वस्त्र, अनुपम तेज धारिनी॥

जय सरस्वती माता॥

देवी शरणागत जन, दुख हरिणी कामिनी।

विषय विकार मिटावे, मोक्ष प्रदान करिनी॥

जय सरस्वती माता॥

पाठ पढ़े जो कोई, मन में ध्यान लगावे।

सुख-संपत्ति घर आवे, ज्ञान प्राप्त करावे॥

जय सरस्वती माता॥

आरती सरस्वती माता की, जो कोई नर गावे।

हितकारी सुखकारी, सुख-संपत्ति पावे॥

जय सरस्वती माता॥

आरती उतारने के बाद

आरती के अंत में “ॐ जय सरस्वती माता” का जयकारा लगाएं और प्रसाद वितरित करें। मान्यता है कि यह आरती नियमित गाने से परीक्षा में सफलता, बुद्धि की तेजी और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है।

बसंत पंचमी 2026 का शुभ मुहूर्त (दिल्ली/उत्तर भारत के अनुसार)

पूजा मुहूर्त: सुबह 7:13 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक (लगभग 5 घंटे 20 मिनट)

मध्याह्न मोमेंट: दोपहर 12:33 बजे के आसपास

तिथि: पंचमी 22 जनवरी रात से शुरू होकर 23 जनवरी तक

इस दिन पीले वस्त्र पहनें, पीले फूल, हल्दी, चावल, केसर और पीली मिठाइयों (जैसे केसरिया हलवा) का भोग लगाएं। बच्चों को किताबें और कलम पूजने के बाद पढ़ाई शुरू करवाएं।

मां सरस्वती की आरती से पूजा को पूरा करें और ज्ञान की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें। जय मां सरस्वती!

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