चीन ने अमेरिका को दिया गाजा पर झटका: शी जिनपिंग ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से किया इनकार, बताई UN वाली वजह!
चीन ने अमेरिका को दिया गाजा पर झटका: शी जिनपिंग ने ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से किया इनकार, बताई UN वाली वजह!
चीन ने गाजा मुद्दे पर अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया है। चीन ने इस फैसले की वजह बताते हुए कहा कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के तहत नहीं है, इसलिए बीजिंग इसमें हिस्सा नहीं लेगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप दावोस, स्विट्जरलैंड में इस बोर्ड को औपचारिक रूप देने की तैयारी कर रहे हैं।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
ट्रंप ने इजराइल-हमास युद्ध को खत्म करने और गाजा में शांति बहाली के प्रयासों की निगरानी के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का प्रस्ताव रखा है। यह बोर्ड गाजा के अलावा अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी व्यापक भूमिका निभा सकता है। ट्रंप का कहना है कि UN को अस्तित्व में रहना चाहिए, लेकिन यह बोर्ड संभवतः इसे ‘रिप्लेस’ कर सकता है। दावोस में साइनिंग सेरेमनी में बोर्ड को फॉर्मलाइज किया जाना है, लेकिन अभी तक 10 से भी कम नेता इसके लिए सहमत हुए हैं। कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने शामिल होने से इनकार कर दिया है या कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई।
शी जिनपिंग ने क्यों किया इनकार?
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बीजिंग “सच्चे बहुपक्षवाद” के लिए प्रतिबद्ध है और UN-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करेगा। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्थिति में चाहे कितने भी बदलाव आएं, चीन UN-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय कानून-आधारित व्यवस्था और UN चार्टर के उद्देश्यों व सिद्धांतों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों की दृढ़ता से रक्षा करेगा।” चूंकि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ UN के तहत नहीं है, इसलिए चीन इसमें शामिल नहीं होगा।
पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
ट्रंप ने गाजा के लिए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा और चीन को शामिल होने का न्योता दिया।
मंगलवार को चीन ने न्योते की पुष्टि की, लेकिन बुधवार को इनकार कर दिया।
इससे पहले, ट्रंप और जिनपिंग की हालिया मुलाकातों में कई मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन गाजा पर मतभेद बने रहे।
चीन ने हमेशा UN की भूमिका पर जोर दिया है और वैकल्पिक फ्रेमवर्क को अस्वीकार किया है, जिसे वह वैश्विक अस्थिरता या “अराजकता” का कारण मानता है।
ट्रंप की प्रतिक्रिया और वैश्विक असर
ट्रंप ने कहा कि UN को जारी रहना चाहिए, लेकिन उनका बोर्ड वैकल्पिक रूप से काम कर सकता है। हालांकि, चीन के इनकार से बोर्ड की वैश्विक स्वीकार्यता पर सवाल उठ गए हैं। प्रमुख यूरोपीय देशों के इनकार से ट्रंप की पहल को झटका लगा है। यह घटना अमेरिका-चीन संबंधों में नई तनाव की शुरुआत हो सकती है, खासकर जब ट्रंप चीन पर व्यापार युद्ध और अन्य मुद्दों पर सख्त रुख अपनाते रहे हैं।
चीन का यह फैसला UN की केंद्रीय भूमिका पर उसके रुख को मजबूत करता है। ज्यादा जानकारी के लिए विदेश मंत्रालय या अंतरराष्ट्रीय समाचार स्रोतों से संपर्क करें। क्या लगता है, ट्रंप का बोर्ड सफल होगा? कमेंट में बताएं!
