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ईरान में प्रदर्शन दबाने वाले अधिकारियों पर अमेरिका का सख्त एक्शन: नए प्रतिबंध लगाए गए

ईरान में प्रदर्शन दबाने वाले अधिकारियों पर अमेरिका का सख्त एक्शन: नए प्रतिबंध लगाए गए

अमेरिका ने ईरान में जारी बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को क्रूर तरीके से दबाने के आरोप में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों और संबंधित वित्तीय नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (U.S. Department of the Treasury) की ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने गुरुवार को यह कार्रवाई की, जिसमें ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी और संस्थाएं शामिल हैं।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बयान जारी कर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। अमेरिका ईरानी लोगों की स्वतंत्रता और न्याय की मांग के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा, “ट्रेजरी विभाग उन सभी को जवाबदेह ठहराने के लिए हर उपलब्ध टूल का इस्तेमाल करेगा जो ईरानी शासन की मानवाधिकारों की क्रूर दमनकारी नीति के पीछे हैं।”

प्रमुख प्रतिबंधित व्यक्ति और आरोप:

अली लारिजानी (ईरान के सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सेक्रेटरी): सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई की ओर से प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया को समन्वयित करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की अपील करने का आरोप। उन्हें “क्रूर क्रैकडाउन के प्रमुख आर्किटेक्ट” कहा गया।

अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और अन्य सुरक्षा बलों के कमांडर, जो प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से कुचलने में शामिल हैं। आरोप है कि उन्होंने हजारों मौतों और घायलों के लिए जिम्मेदार हैं।

अस्पतालों पर हमले: इलाम प्रांत में एक अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और मेटल पेलेट्स फेंकने, मरीजों, परिवारों और मेडिकल स्टाफ पर हमला करने का जिक्र।

शैडो बैंकिंग नेटवर्क: ईरान की तेल बिक्री से होने वाली अरबों डॉलर की कमाई को लॉन्डर करने वाले 13 संस्थाएं और नेटवर्क भी प्रतिबंधित, ताकि शासन की आर्थिक ताकत कमजोर हो।

ये प्रतिबंध एक्जीक्यूटिव ऑर्डर 13553 (ईरान द्वारा गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन पर), 13876 (सुप्रीम लीडर और उनके सहयोगियों पर) और अन्य के तहत लगाए गए हैं। इससे इन व्यक्तियों/संस्थाओं की अमेरिकी संपत्ति फ्रीज हो गई है और अमेरिकी नागरिकों/कंपनियों के साथ उनका कोई कारोबार प्रतिबंधित है। विदेशी बैंक भी सेकंडरी सैंक्शंस का जोखिम झेलेंगे।

प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि:

प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए, शुरुआत में रियाल की गिरावट और महंगाई से। अब ये पूरे देश में फैल गए हैं और शासन के खिलाफ हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हजारों मौतें (कुछ स्रोतों में 2,000 से ज्यादा, ईरान इंटरनेशनल में 12,000 तक का दावा दो रातों में) और 10,000+ गिरफ्तारियां।

इंटरनेट ब्लैकआउट कई दिनों से जारी, प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए इस्तेमाल।

ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि हिंसा जारी रही तो अमेरिका “दखल” देगा या “हेल्प ऑन द वे”। अब सैंक्शंस के साथ दबाव बढ़ा है, लेकिन सैन्य कार्रवाई पर अभी स्पष्ट नहीं।

G7 देशों (अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और EU) ने भी संयुक्त बयान में ईरान की “क्रूर दमन” की निंदा की और आगे प्रतिबंधों की चेतावनी दी। ईरान इन आरोपों को खारिज कर अमेरिका-इजराइल को दोषी ठहरा रहा है।

ये सैंक्शंस ईरानी शासन पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ाने का हिस्सा हैं, ताकि मानवाधिकारों का सम्मान हो और प्रदर्शनकारियों को न्याय मिले। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है—क्या ये दबाव बदलाव लाएगा या और हिंसा बढ़ाएगा?

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