कहीं निकल न जाए पुण्यकाल का मुहूर्त, आज सुबह 12 बजे से पहले कर लें भगवान सूर्य का पूजन!
कहीं निकल न जाए पुण्यकाल का मुहूर्त, आज सुबह 12 बजे से पहले कर लें भगवान सूर्य का पूजन!
मकर संक्रांति का पावन पर्व आज (15 जनवरी 2026) उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश में बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। यह दिन सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जहां सूर्य पूजन, अर्घ्यदान, स्नान-दान और खिचड़ी का विशेष महत्व है। लेकिन पुण्यकाल का मुहूर्त निकलने से पहले ही भगवान सूर्य का पूजन कर लें, वरना फल कम मिल सकता है!
ज्योतिषाचार्यों (जैसे पंडित वेद प्रकाश मिश्रा और स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज) के अनुसार, इस वर्ष संक्रांति का मुख्य पुण्यकाल सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12 बजे तक है। यह समय सूर्य पूजन, अर्घ्य (जल चढ़ाना), स्नान और दान के लिए सबसे शुभ माना जाता है। कई पंचांगों में पुण्यकाल सुबह 7:15 से 8 बजे तक का विशेष उल्लेख है, लेकिन व्यापक रूप से दोपहर 12 बजे तक का समय उपलब्ध है।
सूर्य पूजन का शुभ समय और विधि
पुण्यकाल: सुबह 7:15 AM से 12:00 PM तक (उत्तर प्रदेश में सूर्योदय के बाद से)।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक (अगर आप जल्दी उठ सकें तो सबसे बेहतर)।
सामान्य सूर्य पूजन: सूर्योदय (उत्तर प्रदेश में लगभग 7:00-7:15 AM) से दोपहर 12 बजे तक।
पूजन विधि (संक्षेप में)
सूर्योदय पर पूर्व दिशा में खड़े होकर तांबे के लोटे से अर्घ्य दें (जल में लाल फूल, अक्षत, चंदन मिलाकर)।
मंत्र: “ॐ घृणि सूर्याय नमः” या “ॐ आदित्याय विद्महे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्” का जाप करें।
स्नान में गंगाजल और तिल मिलाएं, फिर सूर्य को प्रणाम करें।
खिचड़ी, तिल-गुड़, कंबल या दान करें—यह उत्तरायण में कई गुना पुण्य देता है।
ध्यान दें: कुछ पंचांगों में संक्रांति 14 जनवरी दोपहर 3:13 बजे से मानी गई, लेकिन उदयातिथि (सूर्योदय पर आधारित) के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 जनवरी को ही मुख्य पूजन और स्नान-दान करना शास्त्रसम्मत है। पुण्यकाल निकलने से पहले (दोपहर 12 बजे तक) सूर्य पूजन जरूर करें—यह स्वास्थ्य, समृद्धि और मोक्ष का द्वार खोलता है!
संक्षेप में, आज का दिन सूर्य की कृपा पाने का सुनहरा मौका है। जल्दी उठें, स्नान करें और सूर्यदेव को अर्घ्य देकर नई शुरुआत करें। जय सूर्यदेव!
