युवा हो जाएं सावधान! एम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट: वजन सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी बना रहा है बीमार!
युवा हो जाएं सावधान! एम्स की चौंकाने वाली रिपोर्ट: वजन सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी बना रहा है बीमार!
भारत में बढ़ता मोटापा (Obesity) अब सिर्फ शारीरिक बीमारियां नहीं, बल्कि युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर खतरे में डाल रहा है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), दिल्ली और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के संयुक्त अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि अत्यधिक मोटे और अत्यधिक पतले युवा अपनी बॉडी इमेज (शरीर की छवि) को लेकर इतना मानसिक तनाव झेल रहे हैं कि यह स्ट्रेस, एंग्जाइटी और गंभीर बॉडी इमेज डिस्ट्रेस का कारण बन रहा है।
अध्ययन की मुख्य बातें
AIIMS-ICMR के इस शोध में 18-30 साल के 1,071 युवाओं (ज्यादातर छात्र और मध्यम वर्ग के) पर सर्वे किया गया, जो AIIMS की OPD में आए थे। नतीजे (Journal of Education and Health Promotion में प्रकाशित):
49.6% मोटे युवाओं और 47.1% कम वजन वाले युवाओं को मॉडरेट से सीवियर बॉडी इमेज कंसर्न का सामना करना पड़ रहा है।
नॉर्मल वजन या ओवरवेट युवाओं में यह आंकड़ा सिर्फ 35-36% है।
37.5% युवा महसूस करते हैं कि लोग उन्हें जज कर रहे हैं।
24.5% युवाओं में वजन से जुड़ी एंग्जाइटी अक्सर रहती है।
मोटे युवाओं में सेल्फ-कॉन्शसनेस (खुद पर शर्मिंदगी) ज्यादा, जबकि पतले युवाओं में कॉन्फिडेंस की कमी, अकेलापन और शर्मिंदगी ज्यादा।
यह बॉडी इमेज डिस्ट्रेस युवाओं के आत्मविश्वास, सोशल लाइफ और यहां तक कि वजन कम करने के प्रयासों को भी प्रभावित कर रहा है। अध्ययन बताता है कि भारत की पब्लिक हेल्थ पॉलिसी अभी मुख्य रूप से मोटापे पर फोकस करती है, लेकिन कम वजन वाले युवाओं के मानसिक बोझ को नजरअंदाज कर रही है।
क्यों है ये युवाओं के लिए बड़ा खतरा?
भारत में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार हर 4 में 1 व्यक्ति मोटापे का शिकार है, और 15 सालों में मोटे लोगों की संख्या दोगुनी हो गई है।
सोशल मीडिया, अनरियलिस्टिक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स और बॉडी शेमिंग से युवा लगातार दबाव में हैं।
इससे डिप्रेशन, एंग्जाइटी और लंबे समय में मानसिक बीमारियां बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वजन मैनेजमेंट में मानसिक स्वास्थ्य को शामिल करना जरूरी है – जैसे साइकोलॉजिकल स्क्रीनिंग, बॉडी-इमेज सेंसिटिव काउंसलिंग और स्कूल-कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम।
क्या करें युवा?
बॉडी पॉजिटिविटी अपनाएं: वजन से ज्यादा स्वास्थ्य पर फोकस करें।
बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और अच्छी नींद लें।
सोशल मीडिया पर फिल्टर्ड इमेजेस से दूर रहें और रियल बॉडीज को सेलिब्रेट करें।
अगर तनाव ज्यादा हो तो डॉक्टर या काउंसलर से बात करें।
AIIMS के विशेषज्ञ प्रो. नवल के. विक्रम ने कहा कि व्यक्ति-केंद्रित देखभाल जरूरी है, ताकि युवा शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहें।
ये रिपोर्ट युवाओं के लिए वेक-अप कॉल है – वजन सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि दिमाग की सेहत से जुड़ा है! स्वस्थ रहें, खुश रहें
