राजनीति

दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस से भिड़े सांसद चंद्रशेखर आजाद: धक्का-मुक्की के बीच मेरठ जाने की जिद, हाईवे पर लगाई दौड़ – पीड़ित दलित परिवार से मिलने की कोशिश

दिल्ली बॉर्डर पर पुलिस से भिड़े सांसद चंद्रशेखर आजाद: धक्का-मुक्की के बीच मेरठ जाने की जिद, हाईवे पर लगाई दौड़ – पीड़ित दलित परिवार से मिलने की कोशिश

गाजीपुर/गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के मेरठ में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण के मामले में राजनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद शनिवार (10 जनवरी 2026) को पीड़ित परिवार से मिलने मेरठ के कपसाड़ गांव जा रहे थे, लेकिन गाजीपुर बॉर्डर पर गाजियाबाद पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और चंद्रशेखर के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई, नोकझोंक चली और हंगामा मचा।

क्या हुआ पूरा घटनाक्रम?

चंद्रशेखर आजाद दिल्ली हवाईअड्डे से अपने समर्थकों के साथ मेरठ के लिए निकले थे।

दिल्ली-मेरठ हाईवे पर गाजीपुर बॉर्डर, काशी टोल प्लाजा, सिवाय टोल और अन्य जगहों पर चार स्तर की सख्त नाकेबंदी की गई थी, ताकि वे आगे न बढ़ पाएं।

गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने काफिले को रोक दिया। चंद्रशेखर कार से उतरकर पैदल आगे बढ़े, पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो धक्का-मुक्की शुरू हो गई।

चंद्रशेखर ने पुलिस से कहा, “मैं चुना हुआ सांसद हूं, मुझे धक्का मत मारो, बदतमीजी मत करो।” उन्होंने हाथ हटाने की चेतावनी भी दी।

पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश में वे हाईवे पर दौड़ लगाकर पुलिस को चकमा देने में सफल रहे। कुछ दूर जाकर वे बाइक पर सवार होकर मेरठ की ओर निकल गए।

पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए भारी फोर्स लगाया था, लेकिन वे भोजपुर तक पहुंच गए।

मामला क्यों गरमा रहा है?

मेरठ के सरधना थानाक्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक दलित महिला की हत्या कर दी गई और उसकी 20 वर्षीय बेटी का अपहरण कर लिया गया। आरोपी पर राजपूत समाज के युवक का नाम आ रहा है। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव है, गांव छावनी में तब्दील हो चुका है। चंद्रशेखर आजाद पीड़ित परिवार से मिलने और न्याय की मांग करने जा रहे थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसमें चंद्रशेखर हाईवे पर दौड़ते और पुलिस के साथ बहस करते दिख रहे हैं। फैंस और समर्थक इसे “दलित न्याय की लड़ाई” बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कानून-व्यवस्था का उल्लंघन मान रहे हैं।

यह घटना दलित न्याय और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही है। क्या चंद्रशेखर पीड़ित परिवार तक पहुंच पाएंगे? क्या राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया आएगी? स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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