’14 घंटे काम के बाद बस ₹700 मिलते हैं…’: हड़ताल के बावजूद मजबूरी में काम पर लौटे डिलीवरी बॉयज, न्यू ईयर ईव पर मिली-जुली तस्वीर
’14 घंटे काम के बाद बस ₹700 मिलते हैं…’: हड़ताल के बावजूद मजबूरी में काम पर लौटे डिलीवरी बॉयज, न्यू ईयर ईव पर मिली-जुली तस्वीर
नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025: नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल का असर दिखा, लेकिन पूरी तरह सेवाएं ठप नहीं हुईं। एक तरफ यूनियंस ने लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के ऐप लॉग-आउट करने का दावा किया, तो दूसरी तरफ बड़ी संख्या में डिलीवरी एजेंट्स मजबूरी और बढ़े इंसेंटिव्स के लालच में काम पर दिखे। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट, जीप्टो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कुछ शहरों में देरी और कैंसिलेशन हुए, लेकिन कंपनियों ने हाई पेआउट देकर स्थिति संभाल ली। दिल्ली-NCR, मुंबई, बेंगलुरु में कई डिलीवरी बॉयज ने दर्द बयां किया – “14 घंटे काम के बाद बस ₹700-800 बचते हैं, पेट्रोल-मेंटेनेंस काटकर।”
हड़ताल का असर और जमीनी हकीकत
यूनियन लीडर शैक सलाउद्दीन (TGPWU) ने दावा किया कि 1.7 लाख से ज्यादा वर्कर्स ने हड़ताल में हिस्सा लिया, जिससे 50-60% डिलीवरी प्रभावित हुई। लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट्स अलग तस्वीर दिखाती हैं:
कई डिलीवरी बॉयज ने कहा, “हड़ताल सही है, लेकिन परिवार चलाना है। इंसेंटिव्स ज्यादा हैं आज, इसलिए काम कर रहे हैं।”
जोमैटो ने पीक ऑवर्स में ₹120-150 प्रति ऑर्डर, स्विगी ने ₹10,000 तक कमाई का ऑफर दिया।
कुछ इलाकों में देरी हुई, लेकिन कुल मिलाकर सेवाएं जारी रहीं।
वर्कर्स का दर्द
एक डिलीवरी बॉय ने बताया, “14-16 घंटे काम करते हैं, लेकिन पेट्रोल, खाना, मेंटेनेंस काटकर ₹700-800 बचते हैं। 10-मिनट डिलीवरी से जान जोखिम में।” मांगें: न्यूनतम ₹20/किमी, ₹40,000 फिक्स सैलरी, आईडी ब्लॉकिंग रोक, इंश्योरेंस और सोशल सिक्योरिटी।
कंपनियां कहती हैं – इंसेंटिव्स फेस्टिव पीरियड की रेगुलर पॉलिसी। लेकिन यूनियंस इसे दबाव मान रही हैं। न्यू ईयर पार्टी प्लान करने वालों को राहत मिली, लेकिन गिग इकोनॉमी की समस्याएं बरकरार। नए साल में उम्मीद है बदलाव आएगा!
