उत्तराखंड

ऋषिकेश में वन भूमि सर्वे का तीव्र विरोध: NH-रेलवे जाम, पथराव में पुलिसकर्मी घायल; 218 लोगों पर मुकदमा दर्ज

ऋषिकेश में वन भूमि सर्वे का तीव्र विरोध: NH-रेलवे जाम, पथराव में पुलिसकर्मी घायल; 218 लोगों पर मुकदमा दर्ज

ऋषिकेश, 29 दिसंबर 2025: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रहे वन भूमि सर्वे के खिलाफ ऋषिकेश में रविवार को भारी बवाल हुआ। स्थानीय लोगों ने गुमानीवाला और मनसा देवी क्षेत्र में हरिद्वार-ऋषिकेश नेशनल हाईवे और रेलवे ट्रैक को घंटों जाम कर दिया। उग्र भीड़ ने पुलिस और वन विभाग की टीम पर पथराव किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया और फ्लैग मार्च किया गया।

यह विवाद करीब 2866 एकड़ आरक्षित वन भूमि से जुड़ा है, जो 1950 में पशुलोक सेवा समिति को लीज पर दी गई थी। 1984 में लीज समाप्त होने के बाद भी निजी कब्जे बने रहे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्वत: संज्ञान लेते हुए अतिक्रमण को ‘व्यवस्थित लूट’ करार दिया और सर्वे का आदेश दिया। सर्वे टीम खाली पड़ी भूमि का चिन्हीकरण कर रही है, लेकिन स्थानीय लोग इसे अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी जमीन बताकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि तीन पीढ़ियों से यहां बसे हैं और बेदखली से परिवार बेघर हो जाएंगे।

प्रदर्शनकारियों ने दोपहर से रेलवे ट्रैक पर धरना दिया, जिससे बाड़मेर एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनें घंटों रुकी रहीं। हाईवे पर किलोमीटर लंबा जाम लग गया। पुलिस की समझाने पर भी नहीं माने तो हल्का बल प्रयोग किया गया, जिसके बाद पथराव शुरू हो गया। देर शाम एसएसपी अजय सिंह के पहुंचने पर स्थिति नियंत्रित हुई।

पुलिस ने हाईवे-ट्रैक जाम और पथराव के अलग-अलग मामलों में 8-16 लोगों को नामजद करते हुए कुल 200 से ज्यादा (218 तक) लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। वन विभाग की महिला रेंजर के साथ छेड़खानी और मारपीट का भी अलग केस दर्ज हुआ। सर्वे कार्य जारी है, लेकिन विरोध के कारण कई इलाकों में टीमों को प्रवेश नहीं मिला।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय अधिकारों के बीच संतुलन का है। सुप्रीम कोर्ट ने लेन-देन पर रोक लगाई है। आने वाले दिनों में और तनाव की आशंका है, प्रशासन अलर्ट पर है।

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