बांग्लादेश पर भारत का कड़ा तेवर: ‘झूठी नैरेटिव फैला रहा ढाका’, हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा की खोली पोल
भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के खिलाफ जारी हिंसा को ‘गंभीर चिंता का विषय’ बताया और ढाका की अंतरिम सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह ‘झूठी कहानियां’ गढ़कर जिम्मेदारी से भाग रही है। MEA प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट कहा कि बांग्लादेश में हिंदू, ईसाई और बौद्ध अल्पसंख्यकों पर ‘निरंतर दुश्मनी’ चल रही है, जिसे मीडिया अतिशयोक्ति या राजनीतिक हिंसा कहकर खारिज नहीं किया जा सकता।
हालिया घटनाओं में मायमेनसिंह में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या और राजबारी में एक अन्य लिंचिंग का जिक्र करते हुए MEA ने कहा कि अंतरिम सरकार के कार्यकाल में स्वतंत्र स्रोतों से 2,900 से अधिक हिंसा की घटनाएं दर्ज हुई हैं, जिसमें हत्याएं, आगजनी और जमीन हड़पना शामिल है। भारत ने इन घटनाओं की कड़ी निंदा की और दोषियों को सजा देने की मांग की। साथ ही, बांग्लादेश में फैलाई जा रही ‘झूठी नैरेटिव’ को पूरी तरह खारिज किया, जिसमें भारत पर आरोप लगाकर ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी तरफ, बांग्लादेश ने इन आरोपों को ‘आंतरिक मामला’ बताकर खारिज किया और कुछ घटनाओं को ‘अलग-थलग’ करार दिया। ढाका का कहना है कि भारत अल्पसंख्यक हिंसा को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, जबकि वहां की स्थिति दक्षिण एशिया के कई हिस्सों से बेहतर है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और विश्लेषक बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों के उभार और अल्पसंख्यकों पर हमलों की पुष्टि कर रहे हैं।
यह विवाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद और तेज हुआ है। भारत ने बांग्लादेश में शांति, स्थिरता और स्वतंत्र चुनाव की वकालत की, लेकिन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं करने का संकेत दिया। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को तलब किया और वीजा सेवाएं निलंबित की हैं। क्या यह तनाव कूटनीति से सुलझेगा या और बढ़ेगा—यह बड़ा सवाल है।
