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अखलाक लिंचिंग केस में यूपी सरकार को झटका: कोर्ट ने केस वापस लेने की अर्जी खारिज की

दादरी लिंचिंग केस में यूपी सरकार को झटका: कोर्ट ने केस वापस लेने की अर्जी खारिज की

2015 के चर्चित दादरी मॉब लिंचिंग केस में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित जिला अदालत ने 23 दिसंबर 2025 को सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई थी। कोर्ट ने अर्जी को “आधारहीन और महत्वहीन” करार देते हुए निरस्त कर दिया। इस फैसले से आरोपियों को राहत देने की सरकार की कोशिशों पर ब्रेक लग गया है और ट्रायल जारी रहेगा।

यह मामला 28 सितंबर 2015 का है, जब दादरी के बिसाहड़ा गांव में गोमांस रखने की अफवाह पर भीड़ ने 52 वर्षीय मोहम्मद अखलाक को घर से घसीटकर पीट-पीटकर मार डाला था। उनके बेटे दानिश को भी गंभीर चोटें आईं। इस घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया था और मॉब लिंचिंग के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए थे। पुलिस ने 19 लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। सभी आरोपी जमानत पर बाहर हैं और ट्रायल में गवाहों के बयान चल रहे हैं।

यूपी सरकार ने अगस्त 2025 में सामाजिक सौहार्द का हवाला देकर CrPC की धारा 321 के तहत मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया था। नवंबर में ट्रायल कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई, जिसमें गवाहों के बयानों में कथित असंगतियां और पुरानी दुश्मनी न होने जैसे तर्क दिए गए। अखलाक के परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया। उनकी पत्नी इकरामन ने ट्रायल कोर्ट के अलावा इलाहाबाद हाई कोर्ट में भी याचिका दायर की, जिसमें सरकार के फैसले को इंसाफ के खिलाफ बताया गया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में वापसी के लिए ठोस कानूनी आधार जरूरी है, जो अर्जी में नहीं था। अखलाक के वकील यूसुफ सैफी ने कहा, “यह फैसला न्याय की जीत है। लाठी से जान लेना छोटा गुनाह नहीं।” परिवार ने राहत की सांस ली, जबकि विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

यह घटना मॉब लिंचिंग और अल्पसंख्यक सुरक्षा के मुद्दे को फिर उजागर करती है। 10 साल बाद भी इंसाफ की लड़ाई जारी है – गवाही पूरी होने और फैसले का इंतजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह कदम लिंचिंग जैसे अपराधों पर सख्त संदेश देता है। अखलाक का परिवार अब ट्रायल के जल्द पूरा होने की उम्मीद कर रहा है। न्याय की यह लड़ाई लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई है।

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